जय हो,,,अमीनगर सराय में कन्याओं पर पुष्प वर्षा करते डॉ. गुण प्रकाश चेतन्य जी महाराज
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अमीनगर सराय। कस्बे में चल रहे सौ कुंडीय अयुतार्द्ध चंडी महायज्ञ और श्रीमद्देवी भागवत महापुराण कथा में शुक्रवार को मां भगवती के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। यज्ञ में आए संतों और यजमानों ने 501 कन्याओं का तिलक और पूजन कर प्रसाद वितरित किया। त्रयंबकेश्वर महाराज ने कहा कि बेटी का जन्म होने पर परिवार सौभाग्यशाली बन जाता है।
सर्वप्रथम यजमानों ने भगवती के सातवें रूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की। आचार्य दिवाकर वशिष्ठ ने यजमानों के निहितार्थ आहुतियां दिलवाई। इसके उपरांत 501 दैवीय कन्याओं के चरण धोकर मंगल टीका किया। स्वामी त्रयंबकेश्वर महाराज, डॉ गुणप्रकाश चैतन्य महाराज और अन्य यजमानों ने कन्याओं को प्रसाद वितरित किया। उपहार भी भेंट किए। शाम को प्रवचन में स्वामी त्रयंबकेश्वर महाराज ने कहा कि जगत जननी कालरात्रि काल को भी हरने वाली है। जगदंबा दिव्य व विराट रूप धारण कर भक्तों को मनोवांछित फल और दुराचारी का संहार करने में जरा भी विलंब नहीं करती। दुराचार, पाप, ईर्ष्या, लोभ, क्रोध व्यक्ति को दुराचारी बनाते है, लेकिन भगवती की अनुकंपा होने पर सब दुष्ट प्रवृतियां नष्ट हो जाती है। माता की कृपा से दुराचारी भी संत के समान हो जाता है। व्यक्ति पाप से मुक्त होकर जीवन के परम आनंद को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि भ्रूण हत्या महापाप है। जन्म से के पहले दैवीय स्वरूप कन्या की गर्भ में हत्या करने वाला व्यक्ति सबसे बड़ा पापी होता है। जिस घर में कन्या का जन्म होता है, वह सौभाग्यशाली होता है। उस घर पर मां लक्ष्मी की असीम अनुकंपा रहती है।
इसके उपरांत हुई काशी आरती में श्रद्धालुओं के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया। भव्य आरती के बाद से देर रात तक श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा की। यज्ञशाला में चिकित्सा शिविर लगाकर श्रद्धालुओं की जांच और उपचार भी किया गया।
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण सस्थिता: अमीनगर सराय में छोटी कन्या का चरण धोते निर्मल चेत्न्य जी - फोटो : BAGHPAT