वृष राशि में सूर्य-बुध के संयोग से बनेगा बुधादित्य योग
बड़ौत। इस बार अक्षय तृतीया 14 मई को है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्य और बुध का संयोग वृष राशि में होने से बुधादित्य योग बनेगा। पंचवटी मंदिर के पंडित कुंदन भारद्वाज ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर किया गया कोई भी काम विफल नहीं होता। इस दिन दान करने से सुखों की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार इस दिन सोना खरीदने की मान्यता है। कहा जाता है कि इस दिन सोना खरीदाने से घर में धन संपदा में बढ़ती है।
इस बार अक्षय तृतीया पर ग्रहों का अच्छा संयोग बना है। इस दिन सूर्य वृष राशि में प्रवेश करेंगे जिससे उनकी राशि का परिवर्तन होगा। वृष राशि में सूर्य और बुध ग्रह का संयोग होगा जिससे वे बुधादित्य योग का निर्माण करेंगे। वृष राशि में शुक्र ग्रह भी उपस्थित रहेंगे। साथ ही चंद्रमा भी उच्च राशि में रहेंगे। इसी दिन भगवान परशुराम जी की जयंती भी मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन उनका जन्म हुआ था जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है।
अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त:
14 मई को पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 05:38 से दोपहर 12:18 तक
पूजा की कुल अवधि: करीब 6 घंटे 40 मिनट
तृतीया तिथि प्रारंभ: 14 मई को सुबह 05:38 बजे से।
तृतीया तिथि समाप्त: 15 मई को सुबह 07:59 तक।
भगवान विष्णू और माता लक्ष्मी की पूजा:
-अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस पूजा से जीवन में सुख की वर्षा होती है और धन की वृद्धि होती है। जो भी सच्चे मन से व्रत कर विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि इस दिन देवता कुबेर ने माता लक्ष्मी से धन की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी। माता ने उनसे प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी की।
दान से दूर होगा बुरा समय
- इस शुभ तिथि पर दान करने से सभी दुख दूर होते हैं। गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक, शहद, मटकी और खरबूजा आदि का दान होता हैं। साथ ही इस दिन नए कारोबार का आरंभ या घर खरीदने के लिए पूंजी निवेश भी कर सकते हैं।