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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: खुदकुशी बुजदिली का काम, मौत नहीं कोई हल, जिंदगी को लगाएं गले

Sun, 10 Sep 2023 01:34 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, बड़ौत/बागपत

सार

पलक झपकते ही जीवन में हर कुछ हासिल कर पाने की तमन्ना लोगों की जान ले रही है। पश्चिमी यूपी के बागपत में हाल में आए आत्महत्या के कुछ मामले दर्शाते हैं कि आखिर किस कर नकारात्मकता लोगों के ऊपर हावी हो रही है। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आज का युवा सपनों में जी रहा है। पलक झपकते जीवन में हर कुछ हासिल कर लेने की तमन्ना पाल लेता है। इस होड़ में जरा सी नाकामी उसे अखरने लगती है। इस वजह से मानसिक तनाव का शिकार होकर अपनी जिंदगी तक दांव पर लगा देता है। आपको हैरानी होगी कि जनपद बागपत में हर साल तकरीबन 250 से अधिक लोग आत्महत्या कर रहे हैं। आत्महत्या बुजदिली का काम, फिर भी लोग मौत को ही हल मानकर जिंदगी गंवा देते हैं। मगर यह गलत है, इसलिए नकारात्मक विचारों को त्यागो और जिंदगी को गले लगाकर जीवन जीना सीखो।

केस नंबर एक

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अमीनगर सराय के रोशनगढ़ गांव के जंगल में 24 जून 2023 को सरकारी नौकरी नहीं लगने से परेशान युवक सैदपुर गांव निवासी गौरव (25) ने फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली थी। मृतक का बड़ा भाई राहुल सीआईएसएफ में है। उसने बताया कि गौरव सेना व पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था।

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केस नंबर दो 
सुभानपुर निवासी छात्रा(22) 2014 में गाजियाबाद के एक कॉलेज से एमबीए की पढ़ाई कर रही थी। एमबीए द्वितीय वर्ष के परीक्षा परिणाम में कम अंक आने पर छात्रा ने पंखे से लटककर आत्म हत्या कर ली।

केस नंबर तीन 
पिछले  8 अगस्त 2023 को ट्योढ़ी गांव निवासी युवक अभिषेक (28) पुत्र रमेश चंद्र ने बड़ौत रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी। वह बेरोजगार था और परेशान चल रहा था।केस नंबर चार 
बिनौली के दौझा गांव के विनोद प्रजापति के बेटे अभिषेक ने 28 अगस्त 2016 में प्राचीन बरनावा लाक्षागृह के श्री महानंद संस्कृत महाविद्यालय में गुरुकुल की छत पर बने कमरा नंबर 41 में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। छात्र काफी समय से टेंशन में था। ये तो मात्र चार उदाहरण हैं। ऐसे तमाम मामले है, जिनमें लोग जीवन में संघर्ष नहीं कर पाते।

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सकारात्मक विचार से मिलती है खुशी और आनंद
दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं मनोवैज्ञानिक डा़ नीरज ने बताया कि सकारात्मक विचार हमारे दिमाग में डोपामाइन एवं नोरपेनेफिरन जैसे रासायनिक द्रव्य की सक्रियता को बढ़ाते हैं, जिससे व्यक्ति को खुशी एवं आनंद की अनुभूति होती है।

सकारात्मक सोच के कारण मेटाबॉलिज्म संतुलित होता है, जिसके कारण मनोविकार उत्पन्न नहीं होते हैं। सकारात्मक सोच, तनाव को ऊर्जा में रूपांतरित करके व्यक्ति की ताकत बना देते हैं। इसलिए नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहे और एक्सरसाइज, योग प्राणायाम, डायरी राइटिंग, पेंटिंग, अच्छा साहित्य पढ़ना चाहिए।

ये हैं लक्षण 
बच्चों के स्वभाव में सतत परिवर्तन दिखाई दे, जैसे नींद में कमी, भोजन में अरुचि, अकेला रहने की आदत, चिड़चिड़ापन, नकारात्मक प्रवृत्ति, आक्रामकता, संवेगिक अस्थिरता आदि मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक लक्षणों को कदापि अनदेखा न करें। आवश्यकता पड़ने पर मनोचिकित्सक की सलाह भी जरूर लें।

ये बोले सीओ 
जब भी मन हताश व निराश हो और खुदकुशी का विचार आने लगे तो तत्काल अपने करीबी या अजीज दोस्त के अलावा परिवार के किसी सदस्य से इन बातों को साझा करें। यदि फिर भी अगर बार-बार ऐसे विचार मन में आएं तो उम्मीदों का दामन जोर से पकड़ लें और नकारात्मक विचारों को त्यागकर जिंदगी को गले लगाना सीखें।  -सविरत्न गौतम सीओ बड़ौत।

 

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