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Baghpat News: दवा न ऑपरेशन...सिर्फ समझ और बच गई कई जिंदगियां व परिवार

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बड़ौत। कभी किसी टूटते रिश्ते को जोड़ने तो कभी गहराते अवसाद से बाहर लाने के लिए न दवा की जरूरत होती है और न ऑपरेशन की। बस जरूरत होती है किसी ऐसे मार्गदर्शक की, जो इंसानी मन को समझ सके। उसको नई राह दिखा सके और जिंदगी में कुछ नया करने की तरफ बढ़ा सके।
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दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज राणा ऐसी ही एक मार्गदर्शिका हैं। उनकी समझ, संवेदना और संवाद ने अब तक कई जिंदगियों को नया रास्ता दिखाया है। डॉ. नीरज की भूमिका केवल एक शिक्षिका की नहीं रही। उन्होंने कॉलेज के बाहर भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई है। वह न केवल छात्र-छात्राओं की समस्याएं सुनती हैं, बल्कि आम जीवन में उलझे टूटे-बिखरते रिश्तों को भी जोड़ती हैं। कई बार पति-पत्नी, अभिभावक और यहां तक कि पड़ोसी परिवार भी उनके पास सलाह के लिए आते हैं और वह बिना किसी पूर्वाग्रह के उन्हें समाधान की राह दिखाती हैं।

50 से अधिक युवाओं को मिला मानसिक संबल
डॉ. नीरज राणा अब तक 50 से अधिक छात्र-छात्राओं, कई नवविवाहित जोड़ों और टूटे हुए पारिवारिक रिश्तों को अपनी काउंसिलिंग और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से फिर से जोड़ चुकी हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक चुप्पी को तोड़ा है और कॉलेज के बाहर भी लोगों को रास्ता दिखाया है।
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नशे में डूबते छात्रों को दी नई दिशा
चार छात्र नशे की लत में पड़कर घर-परिवार से कट चुके थे, जबकि पांचवां आत्महत्या तक की सोच रहा था। जब ये सभी डॉ. नीरज राणा के पास पहुंचे तो उन्होंने धीरे-धीरे बातचीत, भरोसा और निरंतर संपर्क के जरिए उनकी सोच बदली। आज सभी न केवल सामान्य जीवन जीते हैं, बल्कि अपने कॅरियर को लेकर गंभीर भी हैं।

नवविवाहित जोड़ों को मिला नया जीवन-दृष्टिकोण
एक नवविवाहित जोड़ा, जिनका विवाह आपसी मनमुटाव के कारण टूटने के कगार पर था। उन्होंने जब डॉ. नीरज राणा से संपर्क किया तो उन्होंने महीनों की काउंसिलिंग से उनमें संवाद और समझ की एक नई नींव डाली। दूसरे मामले में विवाह के बाद अवसाद में डूबी महिला को परिवार ने बीमारी माना, मगर डॉ. नीरज राणा ने पति-पत्नी को भावनात्मक जुड़ाव की अहमियत समझाई। आज सभी सुखद वैवाहिक जीवन जी रहे हैं।

कई बार सिर्फ सुन लेना ही होता है सबसे बड़ा इलाज
डॉ. नीरज राणा मानती हैं कि हर व्यक्ति को सबसे पहले समझने की जरूरत है। उनकी सोच है कि हर मन को दवा नहीं, दिशा चाहिए। उनकी काउंसिलिंग किसी फॉर्मूले पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की परिस्थिति को गहराई से समझने पर आधारित होती है।
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