बागपत। जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं उत्पाद बना रही हैं, मगर काफी प्रयासों के बावजूद यह उत्पाद बाजार में जगह नहीं बना पा रहे हैं। अब उन्हें बेहतर मंच दिलाने के लिए व्यापारियों के साथ बैठक कराई जाएगी।
जिले की महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनमें कपड़ों और कान्हा की ड्रेस की सिलाई शामिल है। इसके अतिरिक्त वे बेकरी उत्पाद, पशुपालन, डेयरी, अचार, मुरब्बा, कैंडी, चिप्स, पापड़, चटनी, बुकनू और मसाले भी बनाती हैं। इन स्थानीय उत्पादों को बाजार में अपनी जगह बनाने में काफी कठिनाई हो रही है। एनआरएलएम ने इन देशी उत्पादों को बाजार में मजबूती देने के लिए कदम उठाया है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब व्यापारियों से संपर्क करेंगे। वे व्यापारियों को स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों की विस्तृत जानकारी देंगे। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाना है। इससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
-मेलों में भागीदारी और पहचान
अच्छा उत्पादन करने वाले स्वयं सहायता समूहों का चयन किया जाएगा। इन समूहों को जिलों और दूसरे प्रदेशों में लगने वाले मेलों में भेजा जाएगा। मेलों में भागीदारी से महिलाएं दूर तक अपनी पहचान बना सकेंगी। इससे उनकी आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। यह रणनीति उनके उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वर्जन
समूह के उत्पादों को मंच देने के लिए कार्य किया जाएगा। स्थानीय बाजारों में उत्पादों की बिक्री करवाने के लिए समूह की महिलाओं व व्यापारियों के साथ बैठक कराई जाएगी ताकि उत्पादों को बढ़ावा मिल सके। -राहुल वर्मा, उपायुक्त एनआरएलएम