बड़ौत। नगर की कई महिलाएं हर किसी की मदद में जुटी हैं। इन महिलाओं ने मिलकर सारथी के नाम से समूह बनाया और बच्चों से लेकर बड़ों तक की मदद का बीड़ा उठा लिया। जहां बच्चों को मुफ्त में शिक्षण सामग्री बांटती है तो वहीं जरूरतमंदों को खाना खिलाती है। किसी को खून की जरूरत होती है तो तुरंत ही रक्त दिलाने के लिए लोगों को अस्पताल में लेकर पहुंच जाती है।
बड़ौत कस्बे की रहने वाली वंदना गुप्ता, शिवानी जैन, पूजा वर्मा समेत कई महिलाओं ने पहले खुद मिलकर सारथी के नाम से समूह बनाया। सारथी नाम इसलिए रखा गया, क्योंकि सारथी ही लोगों को मंजिल तक पहुंचाने में मदद करते हैं। इन महिलाओं ने शुरूआत स्कूलों में जाकर बेटियों को सेनेटरी पैड बांटकर की। क्योंकि कई बार ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां किसी से कुछ बताती नहीं है।
यह सिलसिला शुरू हुआ तो समूह से सौ से ज्यादा महिलाएं जुड़ गईं जो स्कूलों में बच्चों को शिक्षण सामग्री बांटती है। इसके साथ ही सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से लोगों के संपर्क में रहती है और किसी को रक्त की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए रक्त का प्रबंध किया जाता है। रक्त देने के लिए खुद ही अस्पताल में किसी न किसी को लेकर पहुंचती हैं। इसके साथ ही अब सारथी रसोई शुरू की गई है।
इस सारथी रसोई को अभी महीने में एक बार शहर के बीच से गुजर रही नहर के पास चलाया जाता है। जहां जरूरतमंद भरपेट खाना खाते हैं तो कई बार महीने में दो बार भी रसोई चलाई जाती है। इसको भी धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है। इस तरह से सारथी का कारवां और मदद का दायरा भी बढ़ता जा रहा है।
रोजाना किसी न किसी तरह सौ लोगों की मदद का लक्ष्य
इस मुहिम को शुरू करने वाली वंदना गुप्ता बताती है कि इससे लगातार महिलाएं जुड़ रही हैं। हमारा लक्ष्य रहता है कि रोजाना किसी न किसी तरह से सौ लोगों की मदद की जाए। इनमें विधवा महिलाओं को पेंशन दिलवाने के अलावा जरूरतमंदों को कपड़े दिलवाने समेत अन्य कार्य भी शामिल हैं। इस कार्य के लिए अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि भी समूह की महिलाओं को सम्मानित कर चुके हैं।
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रोजाना रसोई चलाकर खाना खिलाने की तैयारी
इस मुहिम में शामिल शिवानी जैन कहती है कि आज भी काफी लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिलता है। इसलिए ही जरूरतमंदों को खाना खिलाने की मुहिम शुरू हुई और अब रोजाना जरूरतमंदों को खाना खिलाने के लिए रसोई संचालित करने पर विचार किया जा रहा है। पूजा वर्मा कहती हैं कि लोगों को भी इस तरह के सामाजिक कार्यों के लिए आगे आना चाहिए। ताकि समय पर जरूरतमंदों की मदद की जा सके। उन्होंने बताया कि महीने की पहली तारीख में रसोई लगाई जाती है, जिसमें शहर के लोग भी पहुंचकर सेवा करने लगे हैं।