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मां चंद्रघटा की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बागपत। तीसरे नवरात्र पर मंदिरों और घरों में माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की गई। मां चंद्रघंटा साहस और शक्ति की देवी है। सोमवार को मंदिरों में कीर्तन के कार्यक्रम कर माता का गुणगान कर प्रसाद वितरित किया गया।
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ज्योतिषाचार्य राजकुमार शास्त्री और खेकड़ा के बाबा काले सिंह मंदिर के पुजारी अनिल गोनियाल ने बताया कि देवी चंद्रघंटा मन की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर भाग्य को समृद्ध करती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्द्ध चंद्रमा होता है और दस हाथ होते है। इनका स्वरूप दावन, दैत्य और राक्षसों को कंपाने वाला और प्रचंड ध्वनि हिम्मत को परस्त करने वाली होती है। माता की घंटे की प्रचंड ध्वनि बुरी शक्तियों को भागने पर मजबूर कर देती है। माता का उसके साधकों और भक्तों पर सौम्य, शांत होता है। मां चंद्रघंटा की आराधना करने से साधक में साहस के साथ निर्भीकता, सौम्यता और विनम्रता विकास होता है। माता की दृष्टि पड़ने से अद्भुत शांति और सुख का अनुभव मिलता है। सोमवार को मंदिरों में भजन-कीर्तन के कार्यक्रम का माता का गुणगान किया गया।
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