बागपत। यहां पत्नी, मां और भाभी को प्रधान बनवाकर फाइलों पर उनकी जगह परिवार के ऐसे लोग हस्ताक्षर कर रहे हैं, जिनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। इनमें किसी महिला प्रधान का पति तो किसी का बेटा व देवर शामिल है। इसकी शिकायत अब अधिकारियों के पास पहुंची तो फाइलों पर हस्ताक्षर की जांच शुरू कराई गई।
महिलाओं के लिए पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण होता है, मगर यहां इससे काफी ज्यादा महिलाओं ने हाथ आजमाया और वह प्रधान भी बन गई। यहां 244 गांवों में से 122 गांवों में महिला प्रधान है। इनमें से 28 महिला प्रधान निरक्षर हैं। यहां जितनी भी महिलाएं प्रधान हैं, इनमें से 50 प्रतिशत की जगह पति, बेटा व देवर ही फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।
इस मामले में जिला स्तर से लेकर शासन तक शिकायत पहुंची है कि इस तरह महिला प्रधानों को उनके ही परिजन राजनीति में पीछे धकेल रहे हैं। विकास कार्यों में घपले बढ़ने का कारण भी इसको ही बताया गया है। इसलिए पूरे मामले में जांच शुरू करा दी गई है और अब महिला प्रधानों के हस्ताक्षर व फाइलों व हुए हस्ताक्षरों का जल्द मिलान कराया जाएगा।