बड़ौत। जिले में गन्ने की फसल पर सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के गन्ना उत्कृष्टता केंद्र की टीम के सर्वेक्षण में करीब 400 बीघा फसल प्रभावित मिली। बड़ौत क्षेत्र में इसका असर सबसे अधिक पाया गया।
बड़ौत क्षेत्र के कंडेरा, गूंगाखेड़ी, जलालपुर, लौहड्डा, मौजिजाबाद नांगल, बावली, बिजरौल, मलकपुर, सिनौली, आदर्श नगला, बामनौली, दोघट, पुसार, रंछाड़, सिरसली, बिनौली समेत अन्य गांवों में गन्ने के खेतों का सर्वे किया गया। कई खेतों में पत्तियों पर सफेद मक्खी बड़ी संख्या में मिली। इनके कारण पत्तियों का हरा रंग और उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। इस समय गन्ने की फसल बढ़वार की अहम अवस्था में है। पत्तियां पौधे के लिए भोजन बनाने और गन्ने में मिठास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में प्रकोप लंबे समय तक रहा तो बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होने के साथ चीनी की रिकवरी पर भी असर पड़ने की आशंका है।
बागपत, चौहल्दा, टटीरी, काठा, गौरीपुर, सिसाना और सरूरपुर गांवों में भी गन्ने की फसल में कीटों का असर मिला है। मलकपुर चीनी मिल से जुड़े क्षेत्र के किसानों ने प्रभावित खेतों की जांच कराने और रोकथाम के लिए अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें बचाव के सही तरीके और दवा के इस्तेमाल की जानकारी दी जानी चाहिए।
ये बोले किसान
- पत्तियों पर सफेद मक्खी काफी दिखाई दे रही हैं। फसल की बढ़वार के समय इनका बढ़ता असर चिंता की बात है। जल्द रोकथाम नहीं हुई तो नुकसान बढ़ सकता है। अशोक
- क्षेत्र के कई खेतों में कीटों का असर दिखाई दे रहा है। किसानों को सही दवा और उसके इस्तेमाल की जानकारी मिलनी चाहिए। प्रभावित गांवों में अभियान चलाकर फसल को बचाने के प्रयास किए जाएं। राजीव
वर्जन
- गन्ने की फसल का सर्वे किया गया था। सर्वे में बड़ौत क्षेत्र के कई गांवों में सफेद मक्खी का प्रकोप मिला है। अन्य क्षेत्रों की तुलना में बड़ौत क्षेत्र में इसका असर अधिक पाया गया है। किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार समय से रोकथाम के उपाय करने की जरूरत है। डॉ. विकास कुमार मलिक, वैज्ञानिक एवं प्रभारी, गन्ना उत्कृष्टता केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा