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Baghpat News: किसान हुए जागरूक तो बढ़ने लगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति

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खेकड़ा। किसान जागरूक हुए तो मिट्टी की उर्वरा क्षमता बढ़ गई। किसान मिट्टी की उर्वरा क्षमता बढ़ाने के लिए अब रसायनिक खाद के साथ गोबर व हरी खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं। जमीन की घटती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिक मिट्टी की जांच कराकर पोषक तत्व बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। इसका किसानों को लाभ भी मिल रहा है और फसलों की पैदावार भी बढ़ रही है।
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जमीन में कार्बनिक पदार्थों की कमी के कारण फसल का उत्पादन कम हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार फसल के अच्छे उत्पादन के लिए मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा 0.5 प्रतिशत या इससे अधिक होनी चाहिए। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की कमी होने पर वाटर होल्डिंग की क्षमता कम हो जाती है और पौधे के फैलाव भी नहीं होता है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति कम होने लगती है और फसल का उत्पादन कम होता है।

ऐसे प्रभावित होती है फसल
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी में कार्बनिग पदार्थों की कमी होने पर फसल कमजोर और पीली पड़ जाती है। फसल का दाना सिकुड़कर हल्का हो जाता है। जड़ कमजोर होने के कारण पौधा नीचे की ओर झुक जाता है। अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की उर्वरा क्षमता बढ़ाने के लिए कार्बनिक पदार्थों की अनिवार्यता जरूरी है। किसानों के जागरूक होने से मिट्टी की कार्बनिक पदार्थों की मात्रा 0.2-0.3 से बढ़कर 0.4-0.6 तक हो गई है।
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रासायनिक खाद के प्रयोग से कम हो जाते हैं पोषक तत्व
फसल में अधिक मात्रा में रासायनिक खाद का प्रयोग करने से पोषक तत्वों में कमी आ जाती है और धीरे-धीरे जमीन की उर्वरा क्षमता कम होने लगती है। जिससे फसल का उत्पादन घट जाता है। जमीन की उर्वरा क्षमता बनाए रखने के लिए गोबर और जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए, जिसको अब किसान करने लगे हैं। इसके साथ ही गन्ने में पत्ती भी खाद का बेहतर विकल्प है।

मिट्टी की जांच कराने के लिए बढ़ रहा किसानों का रुझान
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. देव कुमार का कहना है कि जमीन की उर्वरा क्षमता बढ़ाने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। किसान भी मिट्टी का परीक्षण कराने के बाद उपचार कर फसल उगा रहे है, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ रही है। जमीन में पोटाश और फास्फोरस के कारण पौधा जल्दी ग्रोथ नहीं कर पाता। इसके अलावा नाइट्रोजन, सल्फर और मैग्निशियम फसल का उत्पादन बढ़ाने में सहायक होते हैं। उनके अनुसार ढांचे की बुवाई करने से नाइट्रोजन की कमी पूरी होने के साथ ही जलधारण क्षमता भी बढ़ती है। किसान रासायनिक खाद के साथ जैविक खाद का प्रयोग कर रहे हैं।
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