तमेलागढ़ी में खेतों में घुसा हिंडन नदी का पानी। संवाद
बागपत। पहाड़ों पर लगातार बारिश के बाद यमुना में बढ़ा जलस्तर अब घटने लगा है, मगर इससे यमुना किनारों पर मिट्टी कटान होने से 200 बीघा से अधिक भूमि यमुना में चली गई। वहीं किसानों की सब्जी और चारे की फसल भी बर्बाद हो गई।
यमुना नदी में बाढ़ से फसलों को बचाने के लिए हरियाणा की तरफ ठोकरें लगा दी गई हैं, लेकिन बागपत की तरफ कुछ नहीं किया गया है। दो दिन पहले पहाड़ों पर भारी बारिश होने के बाद यमुना में एक लाख 89 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने से यहां जलस्तर काफी बढ़ गया था। इससे किसानों को काफी नुकसान हो गया था। यमुना की तलहटी व किनारे के खेतों में खड़ी ज्वार, लौकी और ईख समेत अन्य फसलें जलमग्न हो गईं। यमुना का जलस्तर सोमवार को 210 मीटर पर पहुंच गया था, जो अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। मंगलवार को यमुना में 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो बुधवार तक बागपत पहुंचेगा। फिलहाल किसानों के सामने भूमि कटान की समस्या है और भूमि कटान होने से खड़ी फसल यमुना में बह रही है।
वर्जन
- अब पहाड़ों पर बारिश कम होने के कारण यमुना नदी का जलस्तर कम होने लगा है। वर्तमान में यमुना में 40 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है और इससे किसी तरह की परेशानी नहीं है। -रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग