बागपत। पहाड़ों पर भारी बारिश से यमुना में बाढ़ आने के बाद अब जलस्तर घटने लगा है। इससे यमुना किनारों पर मिट्टी कटान होने से 100 बीघा से अधिक भूमि यमुना में बह गई। इससे किसानों की सब्जी और पशुओं के चारे की फसल भी बर्बाद हो गई। उधर, बाढ़ राहत नियंत्रण विभाग के कर्मी बाढ़ चौकियों से यमुना के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं।
यमुना नदी में बाढ़ से फसलों को बचाने के लिए हरियाणा की तरफ ठोकरें लगा दी गई हैं, लेकिन बागपत की तरफ अफसरोंं की लापरवाही सामने आ रही है। कुछ दिन पहले पहाड़ों पर भारी बारिश से यमुना में आई बाढ़ से जिले के किसानों को काफी नुकसान हो गया क्योंकि हरियाणा की तरफ ठोकरें लगाई जाने के कारण यमुना की धार बागपत की तरफ मुड़ गई और किनारे पर खेतों में खड़ी ज्वार, लौकी, ईख समेत अन्य फसलें जलमग्न हो गईं। इससे यमुना का जलस्तर 70 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया था। उधर, एक सप्ताह बाद यमुना का जलस्तर घटकर 40 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। इससे नदी में बड़े स्तर पर मिट्टी कटान शुरू हो गया। इससे जिले में 100 बीघा से अधिक भूमि कटान होने के कारण यमुना में बह गई और उसमें खड़ी फसल भी बर्बाद हो गई।
किनारे पर मत जाइए..., गिर रही ढांग
यमुना का जलस्तर घटने से किनारों पर खड़ी मिट्टी की ढांग भी गिरने लगी है। ऐसे में बाढ़ राहत नियंत्रण विभाग की टीमें यमुना किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों को किनारों पर जाने से रोक रहे हैं। इसके लिए मस्जिदों से एलान भी कराए गए, जिससे कोई हादसा न हो सके।
किसानों को लाखों रुपये का नुकसान
यमुना किनारे बसे बदरखा, ककोरकलां, शबगा, बदरखा जागोस और टांडा गांव के किसान मदनपाल, यासीन, नितेश, रविंद्र, कालूराम व ओमवीर सिंह संजीव खोखर आदि ने बताया कि बाढ़ आने से टमाटर, भिंडी, मिर्ची, लौकी की फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने बताया कि बाढ़ आने से फसल की लागत भी पूरी नहीं हो पाई और लाखों रुपये का नुकसान हो गया। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से यमुना किनारे ठोकर लगवाने और नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग की।
-
वर्जन-
यमुना का जलस्तर घट रहा है। इससे मिट्टी कटान शुरू हो गया है। यमुना के जलस्तर की स्थिति सामान्य है। बाढ़ चौकियों से जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। -रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।