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बालैनी में वाल्मीकि आश्रम, रामायण से ताजा हो रही यादें

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बालैनी के डौलचा गांव स्थित बाल्मिकी आश्रम स्थित लव-कुश जन्म स्थल - फोटो : BAGHPAT
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बागपत। दूरदर्शन पर प्रसारित हो रहे रामायण महाकाव्य में सीता अब वाल्मीकि आश्रम में प्रस्थान करेंगी। सीरियल में प्रसंग दिखाया जा रहा है। कथा है कि जिले के बालैनी में स्थित वाल्मीकि आश्रम में ही कभी सीता पहुंची थी। पंचमुखी महादेव की स्थापना कर भगवान आशुतोष के आशीर्वाद से लव और कुश को जन्म देगी।
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दूरदर्शन पर रामायण महाकाव्य का प्रसारण चल रहा है। भगवान श्रीराम 14 वर्ष के बनवास के बाद अयोध्या वापस आ गए हैं, और उन्होंने अयोध्या का राज संभाल लिया है। ऐसी कथा है कि लक्ष्मण सीता माता को बालैनी गांव के जंगल में छोड़कर चले गए थे। अब माता सीता का बालैनी का वाल्मीकि मंदिर आश्रय स्थल बनता है और सीता इसी आश्रम में पंचमुखी महादेव की स्थापना करेगी। हिंडन नदी से जल भरकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया। बालैनी बाखरपुर के प्रधान हरि भगवान का कहना है कि रामायण में जो दिखाया जा रहा है, वह सही है। बुजुर्गों ने बताया कि बालैनी में जो आश्रम और मंदिर है, कभी महर्षि वाल्मीकि यहीं पर रहते थे और यहीं पर माता सीता आई । लव कुश का पालन पोषण भी यहीं पर हुआ।
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