तैयारियों के दौरान गांव में 13 बूथ बनाएं गए। इनमें तीन बूथ गांव में हरिजन चौपाल में बनाए गए हैं और बाकी 10 बीआरसी बड़ाैली स्थित विद्यालयों में बनाए गए हैं।
ताज्जुब की बात यह है कि प्राथमिक पाठशाला नंबर-1 में बने एक कमरे में दो अलग-अलग बूथ बीआरसी बड़ौली पर काफी समय पहले बच्चों की पढ़ाई के लिए भेजी गई किताबें से बना दिए गए।
इन किताबों को नगर व देहात क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बांटने के लिए भेजा गया था। अब तक ये किताबें बीआरसी पर धूल फांकती रहीं और अब इन किताबों को चुनाव में इस्तेमाल किया जा रहा है।
एक कमरे में किताबों की दीवार से बनाए दो बूथ
बीआरसी बड़ौली पर स्थित प्राथमिक पाठशाला नंबर-1 के एक कमरे में रखी किताबों से बीचो-बीच तकरीबन दो से ढाई फीट की दीवार बनाई गई और बाद में उक्त दीवार पर तिरपाल ढक दी गई, ताकि किताबें नजर न आएं।
किताबों की दीवार से अब एक कमरे में दो बूथ बनाए गए हैं। इनमें एक बूथ संख्या है 199 व दूसरी बूथ संख्या है 201। दोनों ही बूथों पर अलग-अलग वार्ड भी अंकित कर दिए गए हैं। दोनों बूथों पर मतदान जारी है। बूथ संख्या 199 पर वार्ड नंबर 4 और बूथ संख्या 201 पर वार्ड संख्या 15 के वोटर मतदान करने पहुंचेंगे।
आखिर किसकी है लापरवाही?
वैसे इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की लापरवाही तो उजागर हुई है, क्योंकि जो किताबें विद्यालयों में बंटने थी, उन किताबों को बीआरसी पर धूल फांकने के लिए रख दिया गया था। दूसरी लापरवाही चुनाव केन्द्र पर इस्तेमाल।