अमीनगर सराय। मुंबई के पनवेल में टाॅवर का निर्माण करने गए दस मजदूरों की वहां पर हालत बिगड़ गई। जिनको वहां से वापस लाया गया और यहां तीन दिन के अंदर दो सगे भाई परवेज (22) और रिहान (16) की मेरठ के अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि उनके चार साथियों की हालत गंभीर बनी हुई है। दो भाइयों की मौत होने के बाद मृतकों के परिजनों ने ठेकेदार पर उपचार नहीं कराने का आरोप लगाया।
बिलौचपुरा गांव निवासी सलीम ने बताया कि गांव के ठेकेदार के साथ दस युवक मुंबई के पनवेल में टावर पर मजदूरी करने गए थे, जिनमें तेड़ा गांव के युवक भी शामिल थे। बताया कि कुछ दिन पहले सभी मजदूरों की हालत बिगड़ गई, लेकिन वहां पर मजदूरों का उपचार नहीं कराया गया। आरोप लगाया कि बीमार मजदूरों ने घर जाने की बात कहीं, लेकिन ठेकेदार ने वापस भेजने से मना कर दिया और वहां पर जबरदस्ती काम कराने लगा। छह मजदूरों की हालत ज्यादा बिगड़ने पर रेल में बैठाकर वापस भेज दिया गया, जबकि अन्य मजदूरों को ठेकेदार अपनी गाड़ी से लेकर आया।
उसके बीमार बेटों परवेज और रिहान का बागपत के निजी चिकित्सक के यहां उपचार कराया, जहां से मेरठ रेफर कर दिया गया। दो जून को मेरठ के अस्पताल में उसके बेटे परवेज की उपचार के दौरान मौत हो गई, जिसका शव सुपुर्द कर दिया। इसके बाद मेरठ के अस्पताल में भर्ती दूसरे बेटे रिहान की बृहस्पतिवार रात मौत हो गई। वहां से रिहान का शव लेकर गांव पहुंचे। मृतक के परिजनों ने ठेकेदार पर लापरवाही बरतने और खाने में जहरीला पदार्थ देने की शिकायत पुलिस से कर दी। इस पर पुलिस ने रिहान का शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। मृतक के परिजनों ने ठेकेदार के खिलाफ सिंघावली अहीर थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। उधर, मजदूरों के साथी यासीन, फरमान, सौराज निवासी बिलौचपुरा और अंकुर निवासी तेडा की हालत भी गंभीर बनी हुई है, जिनका मेरठ समेत अन्य अस्पतालों में उपचार कराया जा रहा है। इनमें भी कई की हालत गंभीर बनी हुई है। इस मामले में सिंघावली अहीर पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। इसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
खराब मिली लीवर और किडनी, बिसरा सुरक्षित
मृतक रिहान के शव का शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम में मृतक रिहान की किडनी और लीवर में संक्रमण हुआ मिला, जिससे किडनी, लीवर समेत शरीर के अन्य अंग भी खराब हो चुके थे। आशंका जताई जा रही है कि बीमार होने पर सही उपचार और खानपान की व्यवस्था नहीं होने से संक्रमण बढ़ गया। इसके अलावा चिकित्सकों ने मौत होने के सहीं कारणों का पता लगाने के लिए बिसरा सुरक्षित कर लिया, जिसकी जांच प्रयोगशाला में कराई जाएगी। इनमें कोरोना जैसे लक्षण नहीं थे।
दस माह बाद ही उजड़ गया अरशी का सुहाग
बिलौचपुरा गांव के परवेज का निकाह दस माह पहले गांव की अरशी के साथ हुआ था, जो छह माह की गर्भवती है। परवेज की मौत होने से निकाह के दस माह बाद ही अरशी का सुहाग उजड़ गया। सलीम के परिवार में छह बच्चे है, जिनमें तीन बेटे और तीन बेटियां है। जिनमें बड़ी बेटी मुस्कान, बेटा परवेज, रिहान, जैनब, राबिया और एक छोटा बेटा है। सलीम अपने परिवार के साथ ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। उसके बेटे परवेज, रिहान की मौत होने से उसके परिवार पर दुख का पहाड़ टूट गया। बृहस्पतिवार रात दूसरे बेटे रिहान की मौत होने का पता चलते ही सलीम की पत्नी शबनम बेसुध हो गई।
आरोप: ज्यादा रुपये कमाने का झांसा देकर ले गया ठेकेदार
सलीम ने बताया कि उसके बेटे परवेज और रिहान भी उसके साथ ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते थे। कुछ दिन पहले गांव के ही ठेकेदार ने ज्यादा रुपये कमाने का झांसा दिया तो उन्होंने दोनों बेटों को मुंबई भेज दिया। आरोप लगाया कि मुंबई के पनवेज में बीमार होने पर ठेकेदार ने मजदूरों का उपचार नहीं कराया। इसका पता चलने पर उन्होंने ऑनलाइन रुपये भेजकर दोनों का उपचार कराया। तबियत ज्यादा होने के बाद भी उनके बेटों से मजदूरी कराई गई, इससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई।