कॉल करने के दौरान समय सिंह पीएसओ (प्रोटेक्टिव सर्विस ऑफिसर) बना था, जबकि खालिद हसन सुप्रीम कोर्ट का जज बना था। दोनों ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि अपना दल के प्रदेश अध्यक्ष बताने वाले अफसर जमाल के कहने पर उन्होंने एसपी को कॉल की थी। सीओ मंगल सिंह का कहना है कि प्रकरण की विस्तार से जांच कराई जा रही है।
अपना दल का नाम भी आया सामने
सीओ मंगल सिंह का कहना है कि दोनों आरोपियों ने अपना दल के कथित प्रदेश अध्यक्ष के कहने पर कॉल की थी। उसने ही दोनों को रविंद्र फौजी के विषय में जानकारी दी और लालच भी दिया था।
छुड़वाने के नाम पर रुपये कमाने का धंधा
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों पहले भी खुद को बड़ा अधिकारी बताकर सिफारिश के लिए कॉल करते रहे हैं। दो-तीन मामलों में उनकी सिफारिश पर पुलिस ने संदिग्ध छोड़ दिए थे, जिस वजह से उनका दुस्साहस बढ़ता गया। खालिद हमेशा अधिकारी बनता था और समय सिंह पीएसओ बनकर बात कराता था।
गाजियाबाद में ही हुआ संपर्क
पिस्टल और रायफल के साथ पकड़ा गया रविंद्र फौजी गाजियाबाद में ही बैंक में नौकरी करता था। जांच में सामने आया है कि यहीं पर सबका संपर्क हुआ।
प्रकरण की जांच कराई जा रही है। दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 420 और 170 में मुकदमा दर्ज कराया गया है। - एसपी अभिषेक सिंह