बागपत। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर साल भर बहुत बातें हुई। योजनाएं बनीं और फाइलें लखनऊ तक भेजी गई। जनप्रतिनिधियों ने दावे और वादे किए, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का हाल और चाल बदलती हुई नजर नहीं आई।
जिला मुख्यालय पर ट्रामा सेंटर के लिए भवन बनकर तैयार है, लेकिन यूनिट अब तक शुरू नहीं हो सकी। शासन ने स्टाफ नियुक्त नहीं किया और न ही संसाधन मौजूद है। बर्न यूनिट तैयार है, लेकिन शुरूआत नहीं हुई। हालात यह है कि बर्न यूनिट में अब डायलिसिस इकाई को शुरू कर दिया गया है। जनप्रतिनिधियों ने दावा किया था कि आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं का भरपूर लाभ मिलेगा, लेकिन नहीं मिला। जिला अस्पताल से गंभीर घायलों को मेरठ, दिल्ली, नोएडा या सोनीपत के लिए रेफर कर दिया जाता है। हालात यह है कि जिले में 21 वेलनेस सेंटर की स्थापना होनी थी, लेकिन अब तक सिर्फ आठ सेंटर शुरू हुए हैं।
सीएचसी पर नहीं मिले डॉक्टर
बागपत। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, सर्जन, महिला रोग विशेषज्ञ इस साल भी तैनात नहीं किए जा सके हैं।
आयुष्मान योजना पर उठे सवाल
बागपत। जिले में संचालित आयुष्मान योजना पर खूब सवाल उठे। आरोप लगे कि अपात्रों को सूची में शामिल कर लिया गया है, जबकि पात्रों को इलाज नहीं मिल रहा है।
यहां मिलती हैं स्वास्थ्य सेवाएं
बागपत। जिले में 200 उपकेंद्र, 21 पीएचसी और आठ सीएचसी के अलावा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं।
स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी का साल
बागपत। साल 2019 में स्वास्थ्य विभाग की खूब किरकिरी हुई। जिला अस्पताल में तीमारदार युवती से रेप का प्रकरण लखनऊ तक गूंजा। मोर्चरी से शव बदले जाने पर खूब हल्ला हुआ। महिला मरीज के पेट में ऑपरेशन के बाद तौलिया छोड़ दिया गया। इससे मरीज की मौत हो गई। साल बीतते-बीतते स्टाफ नर्स की फर्जीवाडे़ से भर्ती का खुलासा हुआ।
बर्न यूनिट और ट्रामा सेंटर शुरू कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्टाफ की कमी है, स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है। संभवत: 2020 में यह उद्देश्य पूरा होगा। - सीएमओ डॉ राजकिशोर टंडन।