बागपत। लोकसभा सीट पर कांटे की टक्कर दिख रही हैं। सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में रालोद-भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच टक्कर दिखाई दी तो बसपा भी अपना कोर वोटर व प्रत्याशी की बिरादरी गुर्जरों के वोट लेकर खेल बिगाड़ते हुए दिखाई दी। मुस्लिम व यादवों में जहां साइकिल की रफ्तार दिखी। जाट बाहुल्य गांवों में नल खूब तेज चला और बसपा ने भी कुछ स्थानों पर इनके वोट में सेंधमारी की है। वहीं, मतदान 8.62 प्रतिशत कम रहने के कारण रालोद-भाजपा गठबंधन की चिंता बढ़ गई है और इनमें भी छपरौली पीछे रहा है।
बागपत लोकसभा सीट पर रालोद-भाजपा गठबंधन से डॉ. राजकुमार सांगवान, सपा व कांग्रेस गठबंधन से अमरपाल शर्मा, बसपा से प्रवीण बंसल चुनाव मैदान में रहे। ये सभी अपनी चुनावी नैया पार लगाने के लिए लगातार वोटरों के बीच पहुंचे, मगर चुनाव के शुरूआती समय से मतदान चुप्पी साधे हुए थे। मतदाताओं की यह चुप्पी ही राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा रही थी। अब मतदान होने के बाद यह चिंता बढ़ गई है, क्योंकि मतदान प्रतिशत काफी कम हुआ। हालांकि सभी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, मगर यहां रालोद-भाजपा गठबंधन और सपा-कांग्रेस (इंडिया गठबंधन) के बीच कांटे का मुकाबला नजर आया। जहां एक समय में रालोद का परंपरागत वोट बैंक जाट-मुस्लिम गठजोड़ होता था। मगर इस बार भाजपा के साथ आने से रालोद को मुस्लिम वोट मिलता नहीं दिख रहा है।
छपरौलीः नल खूब चला, मतदान सबसे कम हुआ
छपरौली विधानसभा क्षेत्र में जाट बाहुल्य गांवों में नल ने रफ्तार पकड़े रखी और वोटरों ने खूब नल चलाया, जबकि मुस्लिमों में सपा की साइकिल खूब दौड़ी। कश्यप, जाटव और अन्य जातियों में बिखराव नजर आया। इस सीट पर नल की स्थिति बेहतर दिखाई दी। मगर छपरौली विधानसभा क्षेत्र में 51.42 प्रतिशत मतदान रहने के कारण रालोद-भाजपा गठबंधन की थोड़ी चिंता बढ़ी है।
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बड़ौतः छपरौली की राह चला, साइकिल पर दिखे ब्राह्मण
बड़ौत विधानसभा क्षेत्र की स्थिति भी छपरौली से ज्यादा जुदा नहीं रही। जहां जाट बाहुल्य गांवों में नल खूब चला तो मुस्लिमों ने साइकिल की सवारी की। इस सीट पर ब्राह्मण भी ठीक संख्या में हैं। वे भी ज्यादातर साइकिल पर सवार दिखे। अन्य जातियों में बिखराव नजर आया। यहां भाजपा का कोर वोटर कहे जाने वाले ठाकुर, वैश्य समेत अन्य ने मतदान में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई, जिससे यहां मतदान प्रतिशत 53.57 तक ही सिमट गया। इसका भी असर नतीजों पर दिखाई दे सकता है।
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बागपतः साइकिल खूब दौड़ी, बसपा को अपनी कोर और प्रत्याशी की बिरादरी का सहारा
बागपत विधानसभा क्षेत्र के यादव बाहुल्य गांवों में साइकिल की रफ्तार काफी रही, जबकि ठाकुरों के कई गांवों में भी साइकिल दौड़ती रही। उसके वोट भले ही कम निकलें, लेकिन ठाकुरों ने उसे अपने गांवों से पूरी तरह खाली नहीं रखा। इस क्षेत्र में दलित बसपा के साथ जाते दिखे तो प्रत्याशी के गुर्जर बिरादरी से होने के कारण गुर्जरों का वोट भी बसपा को मिल रहा है। जिसका असर रालोद-भाजपा गठबंधन पर पड़ सकता है। वहीं, इस सीट पर 56.83 प्रतिशत मतदान हुआ है।
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सिवालखासः मुस्लिमों ने दौड़ाई साइकिल, जाटों ने चलाया नल
सिवालखास क्षेत्र में मुस्लिम बाहुल्य गांवों में मतदान को लेकर अधिक उत्साह नजर आया और मुस्लिमों में साइकिल ने गति पकड़ी है, जबकि जाट बाहुल्य गांवों में नल का जोर दिखा है। इस क्षेत्र में भाजपा के समर्थक माने जाने वाले ब्राह्मणों में भी सपा प्रत्याशी अमरपाल ने काफी सेंधमारी की है। इस क्षेत्र में 59.5 प्रतिशत मतदान हुआ।
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मोदीनगरः ब्राह्मणों पर टिकी हर किसी की नजर
मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण वोटों पर हर किसी की नजर टिकी रही। उनमें साइकिल की गति अच्छी दिखाई दी। मगर उसपर भी पूरी तरह से स्थिति साफ नहीं है। क्योंकि गाजियाबाद के पास शहरी वोटर होने के साथ ही भाजपा ने ब्राह्मणों में बिखराव रोकने को अपने कई ब्राह्मण नेताओं को लगाया हुआ था। अब उसमें वह कितने कामयाब हुए हैं, यह बाद में पता चल सकेगा। अन्य वर्गों के वोट बंटते दिखे। हालांकि पूरे लोकसभा क्षेत्र में अगर देखा जाए तो ब्राह्मण वोट बैंक सपा के खाते में अधिक जाता दिखाई दिया है। यही कारण है कि यहां मुकाबला कांटे का हो गया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार लोकसभा सीट पर हार जीत का अंतर भी कम ही रहेगा।
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विधानसभा क्षेत्रवार मतदान प्रतिशत
विधानसभा क्षेत्रः 2019 2024
सिवालखास 68.45 59.5 (प्रतिशत)
छपरौली 61.90 51.42
बड़ौत 63.97 53.57
बागपत 64.59 56.83
मोदीनगर 64.79 58.26
कुल 64.59 55.97