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Baghpat News: ऐसे हुए काम, जिला पंचायत व ब्लॉक दोनों ने कर दिया भुगतान

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बागपत। एक ही विकास कार्य का दो-दो विभागों ने भुगतान कर डाला। यह सुनकर हर कोई चौंक सकता है। मगर, यहां जिला पंचायत और ब्लॉक दोनों ने कोई एक नहीं, बल्कि इस तरह के कई कारनामे किए हुए हैं। सोशल ऑडिट में दस साल पुराने घपलों की परत खुल रही है और आपत्तियां आने पर अफसरों की परेशानी बढ़ती दिख रही हैं।
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बागपत व पिलाना ब्लॉक में वर्ष 2013-17 तक विकास कार्यों पर खर्च किए गए बजट को लेकर सोशल ऑडिट हुआ। इसमें कई मामले पकड़ में आए हैं। बागपत ब्लॉक के अहैड़ा गांव में लाला की समाधि तक सीसी रोड का टेंडर मई 2013 में जारी किया गया। मगर, खंड विकास अधिकारी ने साइट का निरीक्षण किया तो वहां कार्य पहले से हुआ था। इसके लिए उस ठेकेदार को पत्र लिखा गया, जिसे टेंडर दिया गया था।
इसके बाद भी एक फाइल बनाकर कार्य पहले ही होने के कारण भुगतान नहीं करने की बात लिखी गई और दूसरी फाइल बनाकर करीब छह लाख 14 हजार 731 रुपये का भुगतान कर लिया गया। जबकि एक साल पहले ही जिला पंचायत ने उसे बनवाकर भुगतान भी कर दिया था। प्रधानों, शिक्षामित्रों समेत अन्य की बैठक कराने के नाम पर भी 38 हजार रुपये निकाले गए।
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इस तरह वर्ष 2014-15 में नैथला में नाला निर्माण पर सात लाख 90 हजार रुपये खर्च दिखाए गए। मगर, यह कार्य जिला पंचायत ने एक साल पहले ही करा दिया था। करीब ढ़ाई करोड़ रुपये के कार्य गांवों के अंदर करा दिए गए जो गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर होने चाहिए थे।
पिलाना ब्लॉक में इस तरह की गड़बड़ी आई सामने
पिलाना ब्लॉक के हिसावदा गांव की मुस्लिम बस्ती में खडंजा कार्य करने के लिए चार लाख रुपये की निविदा निकाली गई। मगर, इसमें पहला बिल एक लाख का देकर रुपये निकाल लिए। अन्य बिल व कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। इसमें बिना कार्य रुपये जारी होने का शक जताया गया। ठेकेदारों को फायदा देने के लिए 94 लाख रुपये के कार्य देते हुए धरोहर राशि कम जमा कराई गई। विकास के लिए आने वाले रुपये को ब्लॉक के भवन व फर्नीचर पर खर्च कर दिया गया। ब्लॉक प्रमुख रहे अनीस यादव के खाते में दस हजार रुपये वेतन के नाम के भेज दिए गए। मगर, वेतन कब का है, इस बारे में कुछ नहीं बताया गया। इस तरह से कई आपत्तियां लगाई गई हैं, जिन पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
सीडीओ लखनऊ गए जवाब देने
ब्लॉकों में ऑडिट में इस तरह के मामले सामने आए तो शासन से नोटिस जारी किए गए। इनमें ही सीडीओ नीरज कुमार श्रीवास्तव को लखनऊ जाना पड़ा। उनके वहां से आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि किस-किस बीडीओ, इंजीनियर व लेखाकार पर कार्रवाई होगी।
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