सिनौली में निकले ताबूत के पास रखे मिट्टी के बर्तन। फाइल फोटो
बड़ौत। तिलवाड़ा के आला टीले पर ताबूतनुमा आकृति, मिट्टी के बर्तन समेत अन्य पुरावशेष सिनौली में निकले पुरावशेषों से मेल खा रहे हैं। इनके आधार पर यह माना जा रहा है कि योद्धाओं के शवों के पास इस तरह के बर्तनों में घी व दूध रखने की परंपरा थी। हालांकि शोध पूरा होने के बाद पुरातत्वविद इसकी पूरी तरह से पुष्टि करने की बात कहते हैं। वहीं तिलवाड़ा में होली से पहले बंद हुआ उत्खनन दोबारा शुरू करने की तैयारी है।
इतिहासकार डॉ़ अमित राय जैन ने बताया कि सिनौली में तीसरे चरण के उत्खनन में ताबूत, तांबे की तलवार, चाकू, सुराहीनुमा मिट्टी के बर्तन मिले थे। इनके आधार मानव बस्ती के साथ शवाधान केंद्र होने की भी पुष्टि की गई थी। तिलवाड़ा के आला टीले पर अभी तक की खोदाई में ताबूतरानुमा आकृति के पास सुराहीनुमा मिट्टी के बर्तन, तांबे की प्लेट समेत अन्य पुरावशेष मिले हैं।
यह सभी पुरावशेष सिनौली से मेल खाते हैं। इनके आधार पर तिलवाड़ा में मानव बस्ती के साथ शवाधान केंद्र होने की संभावना बन गई हैं। क्योंकि चार हजार साल पहले के योद्धाओं के शवों को ताबूत में दफनाया जाता था। ताबूत के पास मिले मिट्टी के बर्तनों में उनके शव के पास घी, दूध रखने का रीति रिवाज था, जिसके सिनौली में प्रमाण मिल चुके हैं। अब ठीक इस दिशा में तिलवाड़ा टीले पर खोदाई चल रही हैं। सिनौली के बाद यह पुरातत्वविदों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।