बागपत। रालोद का भाजपा के साथ केंद्रीय स्तर पर गठबंधन जरूर हो गया है। मगर स्थानीय स्तर पर रालोद-भाजपा के कार्यकर्ता एक-दूसरे को नहीं पचा पा रहे हैं। उनके बीच खींचतान होती दिख रही है और भाजपाइयों ने बैठकों में शामिल होने के अलावा क्षेत्र में सभी गतिविधियां बंद की हुईं हैं। वहीं दो दिन पहले संयुक्त बैठक में भी खींचतान खुलकर सामने आई। दोनों पार्टियों के बीच सामंजस्य नहीं बना तो इनको नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रालोद का भाजपा के साथ गठबंधन होने के बाद बागपत व बिजनौर सीट रालोद के खाते में चली गई। दोनों सीटों पर रालोद ने प्रत्याशी भी उतार दिए हैं। मगर उसके बाद से भाजपाई केवल कार्यालयों पर बैठकों तक सीमित रह गए हैं और क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों में जाना बंद कर दिया है। भाजपाई केवल औपचारिक बैठकें कर रहे हैं और जनता के बीच पहुंचना फिलहाल बंद कर दिया है। दोनों पार्टियों की संयुक्त बैठकों में भी सभी पदाधिकारी नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं बड़ौत में संयुक्त बैठक में जिस तरह से हंगामा हुआ, उसने दोनों पार्टियों के बीच अंदरूनी तौर पर चल रही खींचतान को सार्वजनिक भी कर दिया।
- पार्टी से जिस तरह का आदेश मिलता है, उसके अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और उसके अनुसार कार्य कर रहे हैं। वोट भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मिलेगी और हम बागपत सीट को पांच लाख वोट से जीतेंगे। - वेदपाल उपाध्याय, भाजपा जिलाध्यक्ष
- मैं परिवार में शादी में व्यस्त हूं। इस विषय में मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। - रामपाल धामा, जिलाध्यक्ष रालोद