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मनुष्य को संसार में भयमुक्त कर देती है समर्पण की भावना: त्रयम्बकेश्वर महाराज

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अमीनगर सराय (बागपत)। कस्बा अमीनगर सराय में चल रहे नौ दिवसीय आयुर्द्ध महाचंडी महायज्ञ के छठे दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संतों ने प्रवचन किए। महाराज त्रयंबकेशर ने कहा कि ईश्वर की भक्ति और समर्पण की मनुष्य को भयमुक्त बना देती है। मनुष्य जीवन भर अपने उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए इधर-उधर भटकता रहता है। इससे उसमें असुरक्षा का भाव उत्पन्न हो जाता है।
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महायज्ञ में छठें दिन आचार्य दिवाकर वशिष्ठ ने यजमानों को भगवती की पूजा अर्चना कराकर शतचंडी पाठ कराया। इसके बाद मंगल आरती कर प्रसाद वितरित किया। सौ कुंडीय महायज्ञ में आचार्यों ने यजमानों के निहितार्थ आहुतियां दी। कथा व्यास स्वामी त्रयंबकेश्वर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि जगतजननी जगदंबा को अपना सर्वस्व मानकर कार्य करने से मन के अंदर का भय समाप्त हो जाता है। जिस पर मां की कृपा हो जाती है, उसे किसी का भय नहीं रहता। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार महाभारत में द्रोपदी इतने बड़े योद्धाओं की पत्नी कहलाने के बाद भी धर्मसभा में अपमानित की जाने वाली थी लेकिन उसकी प्रभु में अगाध श्रद्धा के कारण नारायण श्री कृष्ण ने उनका पल-पल साथ दिया। द्रोपदी का उनके प्रति भाव व समर्पण था, जिसकी वजह से प्रभु ने उसका सम्मान बचाया। सच्चे मन अपने इष्ट के प्रति समर्पण की भावना से मनुष्य के अंदर के भय निकल जाता है। शाम को रंग बिरंगी अलौकिक रोशनी की यज्ञस्थल के सम्मुख भव्य काशी आरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने देर रात तक यज्ञशाला की परिक्रमा कर धर्मलाभ कमाया।

अमीनगर सराय में कथा में भाग लेती महिला श्रद्घालु- फोटो : BAGHPAT

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