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बसौद के क्रांतिकारियों ने बाबा शाहमल के नेतृत्व में लड़ी थी आजादी की लड़ाई

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बागपत। 1857 की क्रांति में बागपत के क्रांतिकारियों ने अहम भूमिका निभाई थी। 17 जुलाई 1857 को बसौद के क्रांतिकारियों ने बाबा शाहमल के नेतृत्व में देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था। क्रांतिकारियों के लहू से गांव के तालाब का पानी भी लाल हो गया था। गांव में प्रतिवर्ष 17 जुलाई को क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इसमें गांव के अधिकांश ग्रामीण उपस्थित होकर अपने पूर्वजों को याद करते हैं।
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10 मई 1857 में मेरठ से शुरू हुई क्रांति की चिंगारी पूरे देश में भड़क गई थी। बागपत भी 1857 की क्रांति से अछूता नहीं रहा। बाबा शाहमल के नेतृत्व में बसौद की जामा मस्जिद को मुख्यालय बनाया गया। अंग्रेजों को क्रांतिकारियों की भनक लग गई और उन्होंने 17 जुलाई 1857 को गांव पर हमला कर दिया। अंग्रेजों ने 180 क्रांतिकारियों को मार दिया था। क्रांतिकारियों के खून से गांव के तालाब का पानी लाल हो गया था। 15 क्रांतिकारियों को बरगद के पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी थी और पूरे गांव को आग लगा दी थी। गांव में प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को शहादत दिवस मनाया जाता है।
बसौद में आज मनाया जाएगा 164 वां शहादत दिवस
अमीनगर सराय। जंग-ए-आजादी 1857 की क्रांति में अहम भूमिका अदा करने वाले क्रांतिकारी गांव बसौद में शनिवार को शहादत दिवस मनाया जाएगा। इसमें ग्रामीण शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। युवा चेतना मंच के संस्थापक मास्टर सत्तार अहमद ने बताया कि शनिवार को शहादत दिवस मनाने के उपरांत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं, आशाओं, आशा संगिनी, व चिकित्सकों को कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। मंच महासचिव समीर अहमद ने बताया कि बसौद की शहादत पर इतिहासकारों ने किताबें लिखीं है। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों में बसौद के इतिहास को शामिल करने और गांव को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की। गांव में इंटर कॉलेज और बैंक की ब्रांच खुलवाकर गांव का विकास कराया जाएं।
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