- जिला जेल में बंदी की मौत होने का मामला, दो चिकित्सकों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम और वीडियोग्राफी भी कराई
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिला जेल में बंदी विकास की मौत होने पर परिवार वालों ने कई सवाल उठाए। तहेरे भाई सतीश ने कहा कि विकास बीमार नहीं था और न ही जेल के अफसरों ने इसके बारे में बताया। उन्होंने हत्या का शक जताते हुए जांच कराने की मांग की।
नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोप में जेल में बंद छपरौली क्षेत्र के विकास कुमार को बुधवार को जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। इसमें जेल अधीक्षक ने विकास के कई दिन से बीमार होने और खून की उल्टी होने से मौत होने का दावा किया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे विकास के तहेरे भाई ने बताया कि 13 अक्तूबर को विकास को जेल भेजा गया था, उस समय पूरी तरह स्वस्थ था। उन्होंने कहा कि विकास की सामान्य मौत नहीं है, उसके साथ कोई घटना जरूर हुई है। विकास के छोटे भाई मोनू की कोरोनाकाल में मौत हो गई थी।
बृहस्पतिवार को दो चिकित्सकों के पैनल ने वीडियोग्राफी कराकर पोस्टमार्टम किया। इस मामले में जांच अधिकारी प्रभाकर केंतुरा ने बताया कि विकास के शरीर पर चोट का एक भी निशान नहीं मिला। बिसरा की जांच के बाद मौत होने के सही कारणों का पता चलेगा।