मां मंशा देवी मन्दिर मे पूजा अर्चना करने के लिये लगी श्रद्वालुओ की लम्बी लाईन
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लंकापति रावण से जुड़ा है बड़ागांव का नाम
खेकड़ा (बागपत)। तहसील क्षेत्र में स्थित रावण उर्फ बडागांव का नाम लंकापति रावण से जुड़ा है। तहसील कार्यालय के राजस्व रिकार्ड में भी यह गांव रावण के नाम से ही दर्ज हैं। इतिहासकार कई वर्षों से इस पर शोध कर रहे हैं। अधिकतर मान्यता यह है कि हिमालय से तपस्या के बाद लंका लौटते समय रावण ने इस मार्ग का इस्तेमाल किया था।
कहा जाता है कि हिमालय पर तपस्या करके मां मंशा देवी को प्रसन्न करके रावण ने उनसे लंका में स्थापित होने का वरदान मांगा था। इस पर देवी ने शर्त रखी थी कि मैं मूर्ति के रूप में तुम्हारे कंधों पर सवार होकर लंका चलूंगी। अगर रास्ते में मूर्ति का भूमि से स्पर्श हो गया तो मैं वही पर विराजमान हो जाऊंगी। बड़ागांव के पास रावण को लघुशंका की इच्छा हुई तो उसने यहां एक त्यागी ग्वाले को मूर्ति को संभालने के लिए दे दिया। लेकिन भोला भाला ग्वाला देवी के तेज को नहीं सह पाया और मूर्ति भूमि पर रख दी। तभी से बड़ागांव में प्राचीन मंशा देवी मंदिर में विराजमान हैं।
मान्यता है कि रावण के लाख प्रयासों के बाद भी देवी की मूर्ति उसे नहीं मिल सकी। तभी से बडागांव का नाम भी रावण पड़ गया। मंशा देवी मंदिर में विष्णु की प्राचीन मूर्ति भी मौजूद है। दसे इतिहासकार आठवीं शताब्दी की बताते हैं। इतिहासकार केके शर्मा ने बताया कि हिमालय से लंका जाने के रावण के मार्ग की खोज के लिए एक प्रोजेक्ट लगभग तैयार है। इसमें देशभर में रावण से संबंधित क्षेत्रों का भ्रमण किया गया। रावण की ससुराल मेरठ बताई जाती है। उधर, मंदिर समिति के अध्यक्ष राजपाल त्यागी, मंदिर के पुजारी उमाशंकर तिवारी, कोषाध्यक्ष उमेश त्यागी, सुरेश कुमार ने बताया कि मंदिर परिसर में रावण कुंड की खुदाई की जा चुकी है। जल्द ही यहां रावण कुंड बनकर तैयार हो जाएगा।