बड़ौत। कोरोना कर्फ्यू के चलते सब्जी उत्पादकों का बुरा हाल है। खेती करने वाले चिंतित हैं कि यदि यही स्थिति रही तो उन्हें भारी आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ेगा। सबसे ज्यादा टमाटर उत्पादन परेशान हैं। टमाटर इन दिनों 15 से लेकर 20 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से थोक में जाता था। यह आजकल 4 से 5 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है।
मौसमी सब्जियों की फसल गांवों में खेतों में लहलहा रही हैं। कोरोना कर्फ्यू के चलते थोक विक्रेता कम सब्जी ही खरीद रहे हैं। यहां से सब्जियां दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य बाहरी राज्यों मेें जाती थीं। मौजूदा हालात के चलते अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। इस बार लॉकडाउन से पहले सब्जियों की फसल बोईं गई थीं। किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें इस बार अच्छा खासा मुनाफा होगा। उत्पादकों का कहना है कि अब स्थिति बदतर हो गई है। जनपद की मंडी में ही वे सब्जी भेज पा रहे हैं। वहां उठान कम होने की वजह मांग भी सीमित है। वहीं, दूसरे राज्यों में भी नहीं भेज पा रहे हैं। इसके चलते वे खेतों से सब्जियों की तुड़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लागत भी नहीं मिलने से वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। वहीं, शासन एवं प्रशासन को भी उनकी चिंता नहीं है।
उत्पादक बोले-
ग्राम हिम्मतपुर सूजती निवासी सब्जी उत्पादक भूरा का कहना है कि पहले हम प्रदेश के दूसरे जनपदों तक लोकी, तोरई, भिंडी आदि सब्जियां भेजते थे तो अच्छा मुनाफा होता था, इस बार नहीं भेज पा रहे हैं।
सूजती निवासी कल्लू का कहना है कि टमाटर दूसरे प्रांतों में जाता था, मगर कोरोना कर्फ्यू के चलते अभी खेतों में ही खड़ा है। इस बार फसल भी अच्छी हुई है मगर बिक्री कम हो रही है। इससे बहुत नुकसान हो रहा है।