फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिमट रहे जंगल, आबादी की ओर बढ़ रहे तेंदुए

विज्ञापन
तेंदूए का फाइल फोटो - फोटो : BAGHPAT
विज्ञापन
- जंगल कम होने के कारण छिपने के ठिकाने नहीं
विज्ञापन

- ईंख की फसल कटाई के बाद बढ़ती है दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। जंगल सिमट रहे हैं। इस वजह से जंगली जानवर अब आबादी की ओर से बढ़ने लगे हैं। पिछले पांच सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब जिले में तेंदुए आबादी क्षेत्र के पास मिले हैं। किसानों ने खेतों में कई बार तेंदुए देखकर वन विभाग को जानकारी दी है। वन जीवों के लिए सबसे मुश्किल यह है कि जंगल में छिपने के लिए जगह नहीं बची है। यही वजह है कि शिकार की तलाश में तेंदुए आबादी की ओर आ जाते हैं और शिकारियों का निशाना बनने लगे हैं।
केस नंबर-एक
- नौ जनवरी 2021 को बड़ौत में दिल्ली-सहारनपुर रेलवे लाइन पर बावली अंडरपास के पास डेढ़ साल के मादा तेंदुए की मौत हो गई थी। तेंदुए की मौत की अब तक जांच चल रही है।
विज्ञापन

--
केस नंबर-दो
- 15 दिसंबर 2020 को बरनावा वन क्षेत्र के शाहपुर बाणगंगा गांव के जंगल में तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया गया था। तेंदुए के सिर पर कई प्रहार किए गए थे। मगर, अभी शिकारी नहीं पकड़े गए।
केस नंबर-तीन
- 23 अक्तूबर 2018 को ककौर कलां गांव में भी शिकारियों की ओर से लगाए गए खटके में तेंदुआ फंस गया था। वन विभाग की देरी के कारण तेंदुए की मौत हो गई थी।
केस नंबर-चार
- निरपुड़ा और हिसावदा गांव में तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया गया था। वर्ष 2002 में पुसार गांव में भी ग्रामीणों द्वारा तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया गया था।
विज्ञापन

----------------------------
बागपत रेंज के रेंजर राजेश शर्मा का कहना है कि जंगल सिमट जाने के कारण वन्य जीवों को मुश्किलें हो रही है। वन विभाग जीवों की रक्षा के लिए समय-समय पर आमजन को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें