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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण की कवायद तेज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बड़ौत (बागपत)। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को एडीएम, एएसपी पुलिस बल के साथ लौहड्डा, बिजरौल और जलालपुर गांवों में अधिग्रहित की गई भूमि से फसल आदि कटवा कर समतल कराया।
जिलाधिकारी राजकमल यादव के आदेश पर एडीएम अमित कुमार, एएसपी मनीष मिश्र, एसडीएम पूजा चौधरी, सीओ युवराज सिंह और एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एसके मिश्रा पुलिस बल के साथ लौहड्डा गांव पहुुंचे। जिन किसानों ने मापतौल कराई भूमि पर गेहूं की फसल बोई थी, उन्हें बुलाकर फसल कटवाई। इसके अतिरिक्त कुछ खेतों में अन्य फसल भी उगाई थी, उसे जेसीबी से नष्ट कराकर जमीन को समतल कराया।
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वर्जन
जिलाधिकारी के आदेश पर कॉरिडोर के निर्माण के लिए लौहड्डा, बिजरौल व जलालपुर गांव से करीब चार किलोमीटर के क्षेत्र को समतल कराया है। - अमित कुमार, एडीएम
हाईवे निर्माण तेजी से चल रहा है। जिस भूमि पर यह कार्य कराया जा रहा है, उसके मालिकों को मुआवजा दिया जा चुका है। - एसके मिश्रा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचआई
ऐसे होगा कॉरिडोर का निर्माण
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को दो चरण में बनाया जाना है। पहला चरण दिल्ली बॉर्डर से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे तक होगा जबकि दूसरा चरण ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से देहरादून तक है। दिल्ली बॉर्डर से ईपीई तक निर्माण का रास्ता पूरी तरह से साफ है, क्योंकि उसका निर्माण नेशनल हाईवे के ऊपर पिलर पर होना है। इससे आगे के निर्माण के लिए बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है।
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जिले के 32 गांवों से गुजरेगा कॉरिडोर
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन भी अधिगृहीत की गई है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। अभी तक 310 किसानों को 108 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया है।
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