ट्रकों के पहिए के सहारे घुमती हैं अर्थ व्यवस्था की खबर से संबंधित फोटो। बागपत के औद्योगिक क्ष
बागपत। यूं तो बागपत का निवाड़ा गांव किसान बाहुल्य है, मगर यहां अर्थव्यवस्था ट्रकों के पहियों के साथ घूमती है। दरअसल, घटती जोत एवं बढ़ती आबादी के साथ नकदी की चाहत में लोग ट्रकों के स्टेयरिंग पर ज्यादा हाथ आजमा रहे हैं। गांव में 200 से ज्यादा ट्रक हैं, जिनसे दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में ईंटों की सप्लाई से कमाई संग युवाओं को रोजगार मिल रहा। अब पैसों के लिए फसल उपज बिक्री का इंतजार नहीं करना पड़ता।
दिल्ली के साथ ही एनसीआर के जिलों में जगह-जगह भवन निर्माण कार्य होते हुए दिखाई देंगे। इन निर्माण कार्यों में ईंटों की बागपत के भट्ठों से सप्लाई होती हैं। इससे गांवों में लोगों ने हाफ बाड़ी के ट्रक खरीदकर ईंटों की सप्लाई शुरू कर दी। निवाड़ा गांव में ही 200 से ज्यादा ट्रक हैं, जिनसे दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद तथा सोनीपत आदि शहरों में ईंट सप्लाई की जाती है।
अधिकांश लोगों ने बैंक एवं फाइनेंस कंपनियों से फाइनेंस कराकर ट्रकों को खरीदा हुआ तो कुछ युवक ईंट भट्ठा मालिकों समेत अन्य के ट्रकों पर ड्राइवरी करते हैं। एक ट्रक से ड्राइवर, हेल्पर तथा चार श्रमिकों के हिसाब से करीब 1200 लोगों को रोजगार मिल रहा है। ट्रकों में ईंटों को भरने तथा उतारने के काम से प्रति श्रमिक प्रतिदिन 500 से 600 रुपये मजदूरी मिलती है।
एक ट्रक से प्रतिदिन औसतन तीन से साढ़े तीन हजार रुपये कमाई हो जाती है। ट्रक मालिक सगीर अहमद व साबिर अली कहते हैं कि कमाई का बड़ा हिस्सा ट्रकों की किस्त चुकाने में जाता है। इतना जरूर है कि घर खर्च के लिए पैसों के लिए फसल बिक्री का इंतजार नहीं करना पड़ता।