बड़ौत। बात-बात पर मजहब की तलवारें खींचने वाले लोगों के लिए शहर का पठानकोट इलाका एक सबक बन गया है। नवरात्र समेत अन्य मौकों पर मां दुर्गा को समर्पित की जाने वाली चुनरी की सजावट यहां मुस्लिम महिलाएं कर रही हैं। एक या दो नहीं करीब पांच सौ परिवार ऐसे हैं, जिनकी रोजी-रोटी चुनरी में गोटा लगाने से चल रही हैं। घर के हर कोने में मां की चुनरी दिखती है।
पठान कोठ मोहल्ले में करीबन आठ सौ मुस्लिम परिवार रहते हैं। खास यह है कि इनमें से करीब पांच सौ परिवार ऐसे हैं, जो नवरात्र शुरू होने से करीब एक माह पहले मां दुर्गा की चुनरी बनाने में जुट जाते हैं। बच्चे, बूढे़ और जवान सुबह से शाम तक चुनरी तैयार करते रहते हैं। अनीस ने बताया उनका परिवार पिछले एक दशक से मां की चुनरी तैयार कर रहा है। उनका घर तो चलता ही है, साथ ही इस तरह के कार्य से कौमी एकता कायम होती है।
अमरीशा ने बताया उन्हें कभी लगा ही नहीं कि वह मुस्लिम होकर मां दुर्गा की चुनरी क्यों तैयार करते हैं। नूर जहां ने कहा काफी समय से मां की चुनरी बनाने का काम करते है। यामीना ने कहा आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए यह मिसाल उन लोगों के लिए अच्छा उदाहरण है, जो दोनों समुदायों में विद्वेष पैदा करने की कोशिश करते हैं।
एक चुनरी के लिए छह रुपये
बड़ौत। पठान कोठ निवासी अब्बास, शौकत, जमील, रुखसाना, जमीला, नूरी, जुबैदा ने कहा माता की चुनरी बनाने से ही परिवार का खर्च नहीं चल पाता। बल्कि माता की चुनरी में गोटा लगाकर सजावट करने में रुचि है। एक चुनरी तैयार करने पर मात्र छह रुपये मिलते हैं। चुनरी बनाने में करीब एक घंटा लगता है। यानी परिवार का एक सदस्य पूरे दिन में दस या 12 चुनरी तैयार कर पाता है।
यहां होती है सप्लाई
पठान कोठ मोहल्ले के गुलफाम, डॉ. गफ्फार, कय्यूम, मेहरबान, जावेद, मुस्कान, शबाना ने कहा चुनरी तैयार होते ही जगह-जगह के ठेकेदार चुनरी खरीदने के लिए आ जाते हैं, जो बाद में दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर आदि जगहों पर सप्लाई करते हैं। मार्केट में इन्हीं चुनरियों को लोग 100 से 150 रुपये में खरीदते हैं। उन्होंने तो मात्र एक चुनरी पर केवल छह रुपये का फायदा होता है।
नहीं हुआ कोई दंगा
वार्ड नंबर 23 के सभासद अरशद ने कहा कई बार मुजफ्फरनगर और अन्य जगहों पर मामूली कहासुनी पर दंगे हो चुके हैं, बागपत जनपद में भी दंगे की आंच पहुंच गई। इसमें वाजिदपुर, बामनौली, किरठल और दोघट में कई जाने भी चली गई, लेकिन आज तक बड़ौत नगर मेें कोई दंगा नहीं हुआ। यही बड़ौत शहर के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियां है। उन्होंने बताया हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग समय-समय पर अपने त्योहारों पर एक-दूसरे के घर पर पहुंचकर बधाई देते हैं।