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मां-बाप की खिदमत से ही खुलेगे जन्नत के दरवाजे, मस्जिदों में अता की गई जुमे की नमाज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी/छपरौली। रमजान मुबारक माह के आखिर जुमा (अलविदा) को समाज के लोगों ने मस्जिदों में नमाज अता की। अलविदा जुमे की नमाज के लिए सुबह से ही मुस्लिमों ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। नमाज में बच्चों ने भी बढ़-चढक़र भाग लिया। अकीकतमंदों ने देश में अमन चैन के लिए दुआ की। वहीं, कहा कि माता-पिता की सेवा करने मात्र से जन्नत मिल जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए नमाज के दौरान मस्जिदों के बाहर व आसपास पुलिस बल तैनात रहा।
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बागपत की बड़ी मस्जिद, जामा मस्जिद, मरकज मस्जिद में समाज के लोगों ने अलविदा जुमे पर नमाज अता कर देश में अमन चैन की दुआ की। उधर, अग्रवाल मंडी टटीरी की देशवाल पट्टी की मस्जिद में मौलवी हाजी जहीर अहमद ने नमाज से पूर्व तकरीर करते हुए कहा कि मां की पैरों में ही जन्नत है। उन्होंने कहा कि जिसके माता-पिता जीवित हैं या इनमें से एक जीवित है। उनकी खिदमत जरूर करें। माता-पिता की सेवा करने मात्र से जन्नत मिल जाएगी। मां की नाराजगी बर्बादी है और पिता जन्नत का दरवाजा है। पिता की भी खिदमत करें क्योंकि जब जन्नत का दरवाजा नहीं खुलेगा तो जन्नत में कैसे दाखिल होंगे। माता-पिता की सेवा से अल्लाह खुश होते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान माह में जिसने रोजा नहीं रखा वह अपनी मगफिरत कब कराएगा। उसे बर्बादी के सिवा कुछ नहीं मिलता। रमजान मुबारक माह के बाकी रोजों को रखकर अपनी अल्लाह से मगफिरत करा लें। तकरीर के बाद कुतबा सुनाया। उसके बाद जुमे की दो रकात नमाज अता कराई गई। मौलवी हाजी जहीर अहमद ने देश की तरक्की, विकास व भाईचारा की दुआ कराई। कस्बे के बाजार वाली बड़ी मस्जिद में मौलाना मोहसिन ने जुमे की नमाज अता कराई। नमाज के दौरान कस्बे के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदों में पुलिस बल तैनात रहा।
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