- दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए चार जिलों के करीब 70 गांवों के किसानों की 1100 हेक्टेयर जमीन हुई अधिग्रहीत
- सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजा देने के लिए बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर के किसान कर रहे आंदोलन
- अभी तक करीब 250 किसानों ने लिया मुआवजा, दो हजार से ज्यादा किसानों को मुआवजा दिया जाना बाकी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का निर्माण जहां कंपनी का टेंडर निरस्त करने के कारण खटाई में पड़ा है, वहीं अब दूसरे चरण का निर्माण मुआवजे के विवाद में फंस गया है। किसान अभी तक केवल अधिकारियों के दफ्तरों में जाकर मुआवजा बढ़ाने की मांग करते थे। मगर, अब एनएचएआई व कंपनी के कर्मियों के काम करने जाने पर विरोध किया जा रहा है। किसानों ने मुआवजा नहीं बढ़ने तक कार्य नहीं होने देने की चेतावनी दी है।
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 27 गांव, मुजफ्फरनगर के सात गांव, शामली के 22 गांव, सहारनपुर के 25 गांव की करीब 1100 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। यह जमीन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से लेकर सहारनपुर तक है, जिसमें बागपत की करीब 350 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को लेकर विवाद चल रहा है, जिसमें अभी तक अधिकारियों के पास जाकर किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग करते थे। मगर, अब एनएचएआई व कंपनी के कर्मी काम करने जाते है तो उनका भी विरोध शुरू हो गया है। इससे कॉरिडोर के दूसरे चरण का निर्माण भी लटकता दिख रहा है।
दो हजार से ज्यादा का मुआवजा अभी लटका
जिन किसानों की कॉरिडोर के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उनमें अभी तक करीब 250 किसानों ने मुआवजा लिया है। दो हजार से ज्यादा किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। इनमें कुछ किसान मुआवजा लेना भी चाहते है, लेकिन उनमें कुछ का जमीन को लेकर आपसी विवाद होने से वह लटका हुआ है। कुछ लोग 2022 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा मांग रहे है। सरकार उनको 2016 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दे रही है।
पहले चरण का निर्माण कंपनी के कारण लटका हुआ
इकनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण दो चरणों में होना है, जिनमें एक दिल्ली से लेकर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे तक है तो दूसरा एक्सप्रेस वे से लेकर देहरादून तक है। इनमें पहले चरण का दिल्ली से ईपीई तक का निर्माण कंपनी को टेंडर रद्द करने का नोटिस भेजने के कारण अटका हुआ है।
जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उनको बढ़ाकर मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसको लेकर कई बार बैठक हो चुकी है, लेकिन यह मामला नहीं सुलझ रहा है। - कृष्णपाल चेयरमैन, मवीकलां
किसानों को नियम के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है। हमारे पास मुआवजे के लिए किसान पहुंच रहे है। जिनको मुआवजे को लेकर आपत्ति है, वह कार्य में बाधा डालने की जगह नियम के अनुसार कार्रवाई करें। - अमित कुमार, एडीएम