बड़ौत। विकास प्राधिकरण ने नगर के 50 फैक्टरी मालिकों को मानचित्र संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में सात दिन का समय दिया गया है। अभिलेख जमा न करने पर फैक्ट्रियों को सील या ध्वस्त करने की चेतावनी दी गई है।
इस कार्रवाई से फैक्टरी मालिकों में नाराजगी है। उन्होंने इस संबंध में राज्यमंत्री केपी मलिक और जिलाधिकारी अस्मिता लाल से मिलने का निर्णय लिया है। फैक्टरी मालिकों का कहना है कि ये सभी फैक्ट्रियां उस समय स्थापित हुई थीं, जब नक्शा पास कराने की आवश्यकता नहीं होती थी। बाबूराम शर्मा, बिजेंद्र जैन और अमित जैन सहित अन्य फैक्टरी मालिकों ने इसे उद्योगपतियों को परेशान करने वाला कदम बताया। उनका तर्क है कि इससे नगर का व्यापार भी प्रभावित होगा। बड़ौत में करीब 250 फैक्ट्रियां संचालित हैं। उन्होंने मांग की कि जिन औद्योगिक इकाइयों की स्थापना बागपत विकास प्राधिकरण के गठन से पहले हुई है, उन्हें नोटिस जारी करने का कारण स्पष्ट किया जाए। प्राधिकरण द्वारा उद्यमियों को परेशान करने की इस कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
-राज्यमंत्री व जिलाधिकारी से मुलाकात की तैयारी
नोटिसों से परेशान फैक्टरी मालिकों ने अपनी समस्या के समाधान के लिए कदम उठाए हैं। वे जल्द ही राज्यमंत्री केपी मलिक से मुलाकात करेंगे। उनसे इस मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही, जिलाधिकारी अस्मिता लाल से भी मिलने का निर्णय लिया गया है। फैक्टरी मालिक अपनी बात अधिकारियों के सामने रखेंगे।
ये बोले फैक्टरी मालिक
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-लघु उद्योग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि फैक्टरी संचालकों को जो नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई है। यह ठीक नहीं है, इससे व्यापार प्रभावित होगा।
-तरुण जैन ने कहा कि इन नोटिसों में स्वीकृत मानचित्र के अभिलेख दिखाने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। यह कार्रवाई फैक्टरी संचालकों को परेशान करने के लिए है।
-विकास प्राधिकरण ने फैक्ट्रियों को नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस उन फैक्ट्रियों को भी मिले हैं, जो हाईवे से हटकर बनी हैं। पंकज जैन ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का मकसद फैक्टरी संचालकों को परेशान करना है।
वर्जन
- जिनको नोटिस भेजे गए हैं, उनको कुछ भी कहना है तो वह अपना जवाब दे सकते हैं। जहां तक प्राधिकरण के गठन से पहले निर्माण होने की बात है तो व्यावसायिक गतिविधियों के लिए तब भी जिला पंचायत व अन्य जगहों से मानचित्र स्वीकृत कराए जाने का नियम था। -विनीत उपाध्याय, एडीएम