बागपत। जिलेभर के मंदिरों के कपाट चंद्र ग्रहण के कारण बंद रहे। शाम को 6.47 पर चंद्र ग्रहण पूरा होने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई कराकर मूर्तियों को स्नान कराया गया और इसके बाद विशेष पूजन किया गया।
यहां बुधवार को दोपहर 3.20 मिनट पर चंद्र ग्रहण शुरू हुआ। चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लग जाता है। सुबह 6.20 मिनट पर सूतक शुरू होने पर मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। चंद्र ग्रहण का मध्य शाम 5.3 बजे रहा। शाम को 6.47 बजे चंद्र ग्रहण का सपापन हुआ। उसके बाद मंदिरों में सफाई और मूर्तियो का स्नान कराकर मंदिरों के कपाट खोले गए और मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना कराई गई। बाबा जानकीदास मंदिर के मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि ग्रहण के नौ घंटे पूर्व सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसके कारण मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते है। सूतक और ग्रहण के दौरान मंदिरों मे पूजन करना निषध माना गया है। शाम को ग्रहण कार्यकाल पूरा होने पर मंदिर में मूर्तियों को स्नान कराने के बाद विशेष पूजन और आरती हुई। सोमवार को शाम 5.56 मिनट से मंगलवार की शाम 5.07 मिनट तक पूर्णिमा और इसके बाद प्रतिपदा तिथि का प्रवेश हुआ। प्रतिपदा तिथि मंगलवार शाम को आने और चंद्र ग्रहण के कारण बुधवार को रंगोत्सव का त्योहार मनाया जाएगा।