टीम इंडिया के लिए खेलने को बेताब असारा की बेटी सिमरन
बागपत। समाज सुधार के नाम पर लड़कियों के बाजार में घूमने, मोबाइल रखने और जींस पहनने पर पाबंदी लगाने वाले असारा गांव की हवा का रुख अब बदलने लगा है। बेटियां उड़ान भर रही है और वह भी खेल के मैदान पर। असारा की बेटी सिमरन चौधरी भी इन्हीं में से हैं। सिमरन ने कड़ी मेहनत कर क्रिकेट में पहचान बनानी शुरू कर दी है। हरियाणा अंडर-23 क्रिकेट टीम में शामिल सिमरन तेज गेंदबाज है। गांव की गलियों में क्रिकेट खेलते-खेलते सिमरन अब हरियाणा की टीम का हिस्सा है। वह कहती हैं कि टीम इंडिया उसका लक्ष्य है। वह देश के लिए खेलना चाहती है।
बता दें कि असारा गांव की पंचायत के फरमान की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो चुकी है। लड़कियों के जींस पहनने, मोबाइल और बाजार में घूमने पर पाबंदी लगाई गई थी। तर्क दिया गया था कि समाज सुधार और छेड़छाड़ के मामले रोकने के लिए ऐसा करना पड़ रहा है। पंचायत के मन में चाहे जो भी रहा हो, लेकिन असारा की बेटियां तमाम पाबंदियों के बीच पहचान बना रही हैं। असारा गांव के छोटी जोत के किसान जमील चौधरी की सबसे छोटी बेटी सिमरन चौधरी ने पहले अंडर-19 क्रिकेट में नाम कमाया, इसके बाद अब उसका चयन हरियाणा की अंडर-23 महिला क्रिकेट टीम में हुआ है।
सोमवार को गुजरात के खिलाफ होने वाले मुकाबले में सिमरन को मौका मिलने की उम्मीद है। दाएं हाथ की तेज गेंदबाज सिमरन ने मेहनत के दम पर यह कामयाबी हासिल की है। सिमरन ने कहा कि उसका लक्ष्य भारतीय टीम में शामिल होना है। वह खुद को मिले हर मौके को भुनाना चाहती है। अंडर-23 की टी-20 टीम में मौका दिया गया है। वह 15 सदस्यीय टीम में शामिल है। पहले तीन मैचों में वह प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं थी, बाकी तीन मैचों में मौका मिलने की संभावना है। छोटी जोत के किसान जमील के सात बेटी और एक बेटा है। बड़े परिवार में जन्मीं सिमरन ने गलियों और गांव के स्कूल में ही क्रिकेट खेलना शुरू किया।
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सिम्मी की जिद पड़ी परिवार पर भारी
बागपत। सिमरन ने क्रिकेट सीखने का फैसला किया तो परिवार में विरोध हुआ। लेकिन सबसे छोटी सिम्मी की जिद के सामने परिवार के लोग हार गए। बागपत के लक्ष्य पब्लिक स्कूल में चलने वाले एकडेमी में उसका एडमिशन कराया गया। यहां सरूरपुर कलां गांव के क्रिकेट कोच मुन्ना से उसने ट्रेनिंग ली। इसके बाद मुन्ना ने मेरठ में ट्रेनिंग दी, वहीं पर सिमरन ने खेल सीखना शुरू किया। जमील चौधरी बताते हैं कि सिमरन को डॉ मुन्ना ने ही गोद लिया है। क्रिकेट खिलाने में उनका ही योगदान है और उन्होंने ही हर कदम पर मदद की।