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बेसहारा गोवंशीय को लेकर फैजपुर और सरूरपुर में तनाव

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बागपत कलक्ट्रीट में हंगामा कर रहे फैजपुर निनाना गांव के लोगो को समझाते अधिकारी - फोटो : BAGHPAT
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बेसहारा गोवंशीय को लेकर फैजपुर और सरूरपुर में तनाव
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बागपत। 200 बेसहारा गोवंशीय पशुओं को लेकर फैजपुर निनाना और सरूरपुर कलां गांव के लोगों में तनाव की स्थिति है। फैजपुर निनाना के लोगों का कहना है कि सरूरपुर के ग्रामीण उनके गांव में पशु छोड़कर गए हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन पशुओं को वापस लिया जाए। वहीं सरूरपुर कलां के प्रधान ने आरोपों से इंकार करते हुए पशु वापस लेने से साफ इंकार किया। मामला प्रशासन के पास पहुंचा गया है, लेकिन समाधान नहीं निकल सका है। ऐसे में दोनों गांवों के बीच टकराव की आशंका बनी हुई है।
निनाना गांव के प्रधान हरेंद्र सोमवार को ग्रामीणों के साथ कलक्ट्रेट में डीएम शकुंतला गौतम से मिलने पहुंचे। हरेंद्र ने बताया कि गांव के जंगल में 200 बेसहारा गोवंशीय पशु हैं। गांव में जमीन नहीं होने के कारण गोशाला नहीं बन सकी है। ये पशु ग्रामीणों पर हमला और खेतों को बरबाद कर रहे हैं। उनके गांव में सरूरपुर के ग्रामीण पशु छोड़कर जा रहे हैं। यमुना से रेत लेने के बहाने सरूरपुर के ग्रामीण आते हैं और बुग्गियों के पीछे बांधकर गोवंशीय पशुओं को उनके गांव में छोड़कर चले जाते हैं। जन चौपाल में भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। ग्रामीणों ने डीएम से गांव में घूम रहे पशुओं को सरूरपुर की गोशाला में छुड़वाने का इंतजाम कराने की मांग की। इस संबंध में कलक्ट्रेट प्रभारी गुलशन कुमार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान सुशीला तेजान, डॉ. वीरेंद्र तेजान, चौधरी इंद्रपाल सिंह, सत्यवीर सिंह, भोपाल सिंह, सुक्रम पाल सिंह, हुकुम सिंह आदि मौजूद रहे।
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नैथला में पशु छुड़वाने से किया इंकार
कलक्ट्रेट प्रभारी गुलशन कुमार ने ग्रामीणों से कहा कि उनके गांव के पशुओं को नैथला गांव की गोशाला में छुड़वा दिया जाएगा। इस पर फैजपुर निनाना गांव के ग्रामीणों ने इंकार कर दिया। उनका कहना था कि नैथला गोशाला में जगह कम है। सरूरपुर में ही जगह अधिक है, वहीं पर पशु छुड़वाए जाने चाहिए।
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किसने क्या कहा
- सरूरपुर के ग्रामीणों ने उनके गांव में आवारा गोवंशीय पशु छोड़े हैं। इस बात को पूरे क्षेत्र के ग्रामीण जानते हैं। वे अपने गांव के पशु वापस लें।
- हरेंद्र, फैजपुर निनाना गांव के प्रधान
- आरोप बेबुनियाद हैं। इक्का-दुक्का ग्रामीण रेत लेने जाते हैं। आज तक सरूरपुर के एक भी ग्रामीण ने पशु निनाना में नहीं छोड़ा है, तो पशु वापस लेने का सवाल ही नहीं है।
- जीत सिंह, सरूरपुर कलां के प्रधान
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