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गन्ना मूल्य 350 रुपये प्रति क्विंटल कम, 450 रुपये करने की मांग उठाई 20-42-48

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किसानों के साथ ही नेताओं ने डीजल, खाद, बिजली के दाम बढ़ने के कारण लागत ज्यादा आने की बात कही
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/बड़ौत। सरकार ने गन्ने के दाम में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है और इस तरह गन्ने का दाम 340-350 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इस बढ़ोतरी को किसानों ने नाकाफी बताया और गन्ने का दाम 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई है। किसानों व नेताओं ने डीजल, खाद, बिजली के दाम बढ़ने के कारण लागत ज्यादा आने की बात कही है।
सरूरपुर गांव के प्रगतिशील किसान सुभाष नैन का कहना है कि डीजल, पेट्रोल, उर्वरकों के दाम काफी ज्यादा हो गए है, लेकिन अब चार साल बाद गन्ने के दाम में केवल 25 रुपये की बढ़ोतरी करके किसानों के साथ मजाक किया गया है। गन्ने का दाम महंगाई को देखते हुए 450 रुपये क्विंटल होना चाहिए था। हमारे यहां से ज्यादा हरियाणा व पंजाब में गन्ने का दाम है।
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रालोद के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरज उज्ज्वल ने कहा कि सरकार ने गन्ने का दाम केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। जबकि किसानों पर डीजल, खाद व बिजली के दाम बढ़ाकर बहुत ज्यादा बोझ डाल दिया गया है। इसको लेकर सरकार का विरोध किया जाएगा।
सिरसली गांव के किसान राजू तोमर का कहना है कि पड़ोस के राज्यों पंजाब व हरियाणा में गन्ने के दाम यहां से ज्यादा है। किसानों की मांग थी कि 450 रुपये प्रति क्विंटल तक गन्ने का दाम होना चाहिए। केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाना केवल मजाक है।
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अग्रवाल मंडी टटीरी के किसान सचिन कुमार का कहना है कि प्रदेश में गन्ने की सबसे ज्यादा पैदावार होती है, लेकिन उसके बावजूद सरकार ने मामूली दाम बढ़ाया है। जबकि सरकार को गन्ने का दाम 450 रुपये प्रति क्विंटल करना चाहिए था।
फतेहपुर पुट्ठी गांव के किसान बाबूराम का कहना है कि वर्तमान में महंगाई बढ़ जाने के कारण खेती करना काफी मुश्किल हो रही है। गन्ने का दाम 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था।
भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र प्रधान ने कहा कि गन्ना अब घाटे की खेती साबित हो रही है। सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा किया था, साढ़े चार साल में गन्ने पर मात्र 25 रुपयेे बढ़ाए जाने से कैसे किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी।
रालोद के प्रेस प्रवक्ता अरुण तोमर बॉबी ने कहा कि गन्ना दाम कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए था। सरकार ने किसानों को छलने का काम किया है। रालोद इसका विरोध करता है। पूर्व विधायक डा. अजय कुमार ने कहा कि इस तरह से केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाना किसानों के साथ भद्दा मजाक है।
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पूर्व प्रमुख सतेंद्र मलिक व रालोद नेता विश्वास चौधरी ने कहा कि बिजली, खाद व पानी पर महंगाई की मार है। ऐसे में गन्ने के दाम में 25 रुपये की बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। सरकार केवल पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है।
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