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हिंदी के विकास के लिए मदरसों में भी विषय शिक्षक

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हाफिज मनव्वर - फोटो : BARAUT
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मदरसा शिक्षक बोले, हिंदी देश की भाषा, इसके विकास के लिए प्रयास करने की जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। अमर उजाला की पहल पर हिंदी के विकास के लिए मदरसे भी आगे आ रहे हैं। वैसे तो मदरसों में अरबी और उर्दू के साथ हिंदी भी पढ़ाई जाती है। मदरसे से जुड़े लोगों का कहना है कि यह एक अच्छी पहल है। हिंदी भाषा हमारे देश की मातृ भाषा है और इसे सभी को जानना चाहिए। बल्कि इसके विकास के लिए अलग से भी प्रयास किए जाने की जरूरत है। इसमें मदरसे भी बेहतर भूमिका निभा सकते हैं।
मदरसा इदारा फैज ए मसीहुल उम्मत हाफिज मुनव्वर का कहना है कि वैसे तो हिंदी भाषा मदरसों में पढ़ाई जा रही है। मदरसों के कार्यालय के अभिलेख हिंदी और उर्दू दोनों ही भाषाओं में तैयार किए जाते हैं। मदरसे के पाठ्यक्रम में जो हिंदी विषय शामिल है, उसे पढ़ाने और सिखाने के लिए और बेहतर किया जा सकता है। मगर, इसके लिए मदरसों को हिंदी शिक्षकों की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि कम से कम जो अनुदानित मदरसे हैं, वहां यह व्यवस्था की जाए तो बहुत बेहतर हो सकता है।
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हाफिज जाहिद ने कहा कि हिंदी को बेहतर बनाने और विकास के लिए अच्छी तालीम की जरूरत है। जो आलिम है या मदरसों पढ़ाने वाले शिक्षक हैं, वो अगर मदरसे के बच्चों को अलग से हिंदी की ट्यूशन दें तो अच्छा काम हो सकता है। हिंदी भी बहुत आसान भाषा है। थोड़ी सी कोशिश से इसके विकास के लिए और बेहतर हो सकता है। वैसे तो मदरसों में एक विषय के तौर पर हिंदी पढ़ाई भी जा रही है, मगर उलमा की थोड़ी कोशिश से इसे और विकसित किया जा सकता है।
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मुफ्ती सखाउल्लाह का कहना है कि वैसे तो हिंदी हमारे मुल्क की राष्ट्र भाषा के साथ साथ आम बोलचाल की भी भाषा है। हमारे मदरसे में अरबी उर्दू के साथ हिंदी भाषा भी बच्चों को पढ़ाई जा रही है। मरकजी व सूबाई हुकूमत सरकारी कार्यों में हिंदी को प्राथमिकता दे तो इसके प्रचार प्रसार में काफी मदद मिलेगी। अमूमन मदरसे के छात्र भी हिंदी और उर्दू भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उनमें और रुचि पैदा करने की जरूरत है।
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