- तीन मानक तय ग्राम सचिवालय के निर्माण के लिए, सबसे छोटा 100 वर्ग मीटर में बन सकता है
- 20 वर्ग मीटर में बना डाले कई गांवों में सचिवालय, जन सेवा केंद्र कैसे चलेगा, सखी व पंचायत सहायक भी नहीं बैठ सकेंगे
बागपत जनपद में पंचायत सहायक को बैठाने और सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) का संचालन एक ही स्थान से हो, इसके लिए शासन ने हर गांव सचिवालय में निर्माण के आदेश दिए थे। बजट जारी हुआ तो इनके निर्माण में खेल शुरू कर दिया गया। निर्धारित किए गए मानकों में पूरी तरह गड़बड़झाला किया जा रहा है। कई गांवों में हालात ऐसे है कि सचिवालय का कमरा शौचालय से भी छोटा बना दिया गया। इस सचिवालयों में न पंचायत सहायक बैठ सकता है और न ही अन्य कोई सुविधा लोगों को नहीं मिल सकती है। कई जगह तो रास्ता तक नहीं बनाया गया है।
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सबसे बड़ा 145 और सबसे छोटा 100 वर्ग मीटर में बनाना जरूरी
शासन के नियमों के अनुसार गांवों में सबसे बड़ा सचिवालय 145 वर्ग मीटर में बनाया जा सकता है। इसमें एक मीटिंग हॉल, चार कमरे, शौचालय जरूरी होता है। इससे छोटा सचिवालय 113 वर्ग मीटर में बनाया जा सकता है, जिसमें मीटिंग हॉल, दो कमरे और दो शौचालय होने चाहिए। इनके अलावा सबसे छोटा सचिवालय 100 वर्ग मीटर का बनाया जा सकता है, जिसमें एक मीटिंग हॉल, एक कमरा, दो शौचालय जरूरी है।
20 वर्ग मीटर में ही बना दिए सचिवालय
सरकार ने गांवों में जल्द सचिवालय बनाने के आदेश दिए, जिससे वहां पंचायत सहायक को बैठाया जा सके और सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) चलाया जा सके। इनके अलावा ग्राम सखी और सचिव के अलावा अन्य अधिकारी भी समय-समय पर यहां बैठ सके। इसके लिए साफ कहा गया कि जब तक गांवों में सचिवालय का निर्माण नहीं होगा, तब तक गांव में अन्य किसी कार्य पर पैसा खर्च नहीं किया जाएगा। इसी में खेल करके केवल 20 वर्ग मीटर तक के सचिवालय बना दिए गए।
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गांवों में तय मानकों के अनुसार सचिवालय में एक मीटिंग हॉल व एक कमरा अनिवार्य होता है। इसी को देखते हुए ही निर्माण कराया गया है। किसी जगह छोटे सचिवालय बनाए गए है तो इस बारे में जानकारी नहीं है। ऐसा हुआ है तो वह गलत है। इसका पता कराया जाएगा। - अमित त्यागी, जिला पंचायती राज अधिकारी