बड़ौत। बाम गांव में मंगलवार दोपहर घर में स्लैब पर रखे बर्तनों से खेल रहे डेढ़ साल के दक्ष के हाथ में सांप ने डस लिया। बच्चे के रोने पर आए परिवार वालों ने सांप को दीवार की दरार में घुसता देखकर देखकर रस्सी बांध दी और उसे बड़ौत सीएचसी लेकर पहुंचे। वहां से बच्चे को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजन बच्चे को निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद भी बच्चे के बचने की उम्मीद में परिवार वाले घर में रातभर झाड़फूंक कराते रहे। इसके बाद बुधवार की सुबह गड्ढे में शव दबाया गया।
बाम गांव में रहने वाले आशीष कुमार ने बताया कि वह मंगलवार को मजदूरी पर गया था, जबकि उसके दो बेटे, पत्नी समेत अन्य परिवार वाले घर पर थे। दोपहर करीब ढाई बजे उसका बेटा दक्ष घर में बेड पर चढ़कर स्लैब पर रखे बर्तनों से खेल रहा था। तभी बर्तनों के पीछे छिपे सांप ने उसके हाथ में डस लिया। इससे वह रोने लगा तो उसकी पत्नी वहां आ गई। उसने सांप को दीवार की दरार में घुसते हुए देख लिया। उसने बेटे के हाथ पर सांप के डसने के निशान मिलने पर शोर मचा दिया।
परिवार और गांव के लोग वहां आ गए। परिवार वालों ने बच्चे के हाथ में रस्सी बांधकर बंद लगा दिया और उसे लेकर गांव में ही चिकित्सक के यहां पहुंचे। उसने एक इंजेक्शन लगाने के बाद बच्चे को बड़ौत सीएचसी ले जाकर एंटी स्नेक वेनम वैक्सीन लगवाने की सलाह दी। बच्चे को लेकर बड़ौत सीएचसी पहुंच गए। आशीष ने बताया कि वहां पर चिकित्सक ने बच्चे के हाथ में लगे रस्सी के बंद को खोलकर उपचार किया।
वहां बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो चिकित्सक ने उसे रेफर कर दिया। वहां से बच्चे को लेकर बड़ौत के निजी अस्पताल में पहुंचे, जहां चिकित्सक ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। आशीष ने बताया कि निजी अस्पताल में बेटे को मृत घोषित होने के बाद कुछ लोगों ने झाड़फूंक से जान बचने की सलाह दी तो घर आकर बेटे को सुबह तक कपड़े में लपेटकर रखा। उस पर पानी भी डालते रहे। बुधवार सुबह को गांव के लोगों ने समझाया तो गड्ढे की खोदाई कराकर शव दबा दिया गया।
पिता बोले चिकित्सक ने एंबुलेंस नहीं मंगवाई, ई-रिक्शा में लेकर घूमते रहे
दक्ष की मौत होने के बाद उसके पिता आशीष कुमार ने बड़ौत सीएचसी में कर्मियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। आशीष ने कहा कि सीएचसी से रेफर करने के बाद बेटे को जिला अस्पताल ले जाने के लिए चिकित्सक ने एंबुलेंस भी नहीं मंगवाई और पैदल ही वहां से भेज दिया। इसके बाद वह अपने बेटे को ई-रिक्शा में लेकर जाने लगा तो उसकी हालत ज्यादा बिगड़ने लगी। इसके बाद जिला अस्पताल की जगह बड़ौत के निजी चिकित्सक के यहां लेकर पहुंचे तो वहां के चिकित्सकों ने उसके बेटे को मृत घोषित कर दिया।
दो भाइयों में छोटा था दक्ष
आशीष कुमार ने बताया कि मजदूरी कर वह अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसके परिवार में दो बेटे थे, जिनमें दक्ष छोटा था। अब उसके परिवार में तीन साल का बेटा रह गया है।
वर्जन-
सांप के डसने से बच्चे की मौत होने का मामला जानकारी में नहीं है। सीएचसी से रेफर किया जाने पर एंबुलेंस नहीं मंगवाने के मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
-डॉ. विजय कुमार, सीएचसी अधीक्षक, बड़ौत