संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। यहां दो साल पहले 18 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए 158 एमओयू हुए, मगर उनमें छोटे कुछ उद्योग ही जमीन पर उतर सके और बड़े अभी तक फाइलों से बाहर नहीं निकल सके। एक कंपनी आठ हजार करोड़ का एमओयू साइन करने के बाद अभी तक एक रुपये का निवेश नहीं कर सकी। किसी को जमीन नहीं मिली तो कई जमीन खरीदने के बाद प्लांट नहीं लगा रहे।
यहां जनवरी 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 158 उद्यमियों ने 18 हजार करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश करने के लिए एमओयू साइन किए थे। तब धड़ाधड़ निवेश के प्रस्तावों से लोगों को बागपत के औद्योगिक विकास की उम्मीद जगी। लेकिन दो साल बाद उनकी उम्मीद धुंधली पड़ने लगी है, क्योंकि 61 उद्यमियों ने तीन हजार करोड़ का निवेश किया। इनमें अधिकतर ने पहले से लगे अपने उद्योगों का विस्तार किया तो एक-दो ने छोटे उद्योग लगाए हैं।
वहीं बड़ी कंपनियों का 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश फाइलों से बाहर नहीं निकल रहा है। इनमें ओनिक्स स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को लीजिए, जिसने बागपत में पवन ऊर्जा का प्लांट लगाने के लिए आठ हजार करोड़ रुपये का निवेश करने का एमओयू साइन किया। मगर दो साल में जमीन तक की व्यवस्था नहीं हो पाई। निवेश नहीं होने का मुख्य कारण जमीन की व्यवस्था नहीं होना बताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार 97 उद्यमियों का निवेश बाकी है, जिनके लिए पांच-छह हजार एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। लेकिन इतनी जमीन मिल नहीं रही है। इसके अलावा निवेश नहीं होने की दूसरी वजह भी हैं। जैसे एमओयू के बाद किसी उद्यमी का मन बदल गया तो कई उद्यमी को ऋण नहीं मिलने या दूसरी समस्या भी सामने आ रहीं हैं। साफ है कि छोटे उद्योग भले ही जमीन पर उतर गए, लेकिन बड़े उद्योग जमीन पर नहीं उतरने से औद्योगिक विकास तथा रोजगार को गति मिलना बाकी है।