बागपत। छह राज्यों के लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के छह सदस्यों को पुलिस की स्वाट टीम ने रविवार को औद्योगिक क्षेत्र में चेकिंग के दौरान गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से पांच लाख रुपये, 65 आधार कार्ड, 24 सिमकार्ड, 53 पैनकार्ड, टाटा हैरियर समेत दो गाड़ी, चैकबुक, लैपटॉप, टैबलेट समेत अन्य सामान बरामद किया गया। पूछताछ में गिरफ्तार किए गए साइबर ठगों ने आधार कार्ड में एडिट कर सिमकार्ड निकलवाकर ठगी करने के बारे में बताया।
भारत सरकार के प्रतिबिंब पोर्टल पर साइबर ठगी की घटना में प्रयुक्त मोबाइल नंबर की लोकेशन बागपत में मिली। बागपत पुलिस ने जांच शुरू की। रविवार को औद्योगिक क्षेत्र में साइबर ठगों के गिरोह के सदस्य अनुज कुमार उर्फ बब्लू निवासी गांधी रोड बड़ौत, हिमांशु उर्फ विशु निवासी गौसपुर, मोनू निवासी ताहिरपुर सराय नई दिल्ली, विनीत उर्फ गोलू निवासी सुभानपुर, अक्षित उर्फ अभय निवासी धीराहेड़ी जिला मुजफ्फरनगर, तुषार निवासी आराधर मोहल्ला देहरादून को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने साइबर ठगी की कई घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया। गिरोह के सदस्यों ने बताया कि आधार कार्ड एडिट करने के बाद मोनू निवासी ताहिरपुर नई दिल्ली को भेज देते थे, जो उन्हें फर्जी आधार कार्ड से निकलवाए गए सिमकार्ड उपलब्ध करा देता था। इसके अलावा उन्हें आधार कार्ड से बैंकों में खाते खुलवाकर एटीएम निकलवा लेते थे। सिमकार्ड से लोगों को फोन करके ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग कर रुपये कमाने के लिए उकसाकर व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेज देते थे।
एपीके फाइल मोबाइल में डाउनलोड होते ही सारी जानकारी उन्हें मिल जाती थी। इसके बाद बैंक खातों से रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कराकर एटीएम से निकाल लेते थे। एसपी सूरज कुमार राय ने बताया कि गिरफ्तार किए गए साइबर ठगों ने पटना बिहार, चंडीगढ़, अहमदाबाद गुजरात, पुणे, उदयपुर राजस्थान, अयोध्या, लखनऊ और पश्चिम बंगाल के दो लोगों से ठगी की, जिन्होंने हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करा रखी है। उनका रिकाॅर्ड खंगाला जा रहा है। गिरोह के सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जाएगी। सभी आरोपी औद्योगिक क्षेत्र में ठगी की रकम का बंटवारा करने के लिए आए थे।
वीआईपी आईडी और क्रिप्टो बेटिंग का भी देते थे झांसा
एसपी सूरज कुमार राय ने बताया कि गिरफ्तार किए गए साइबर ठग ऑनलाइन वीआईपी कार्ड और क्रिप्टो बेटिंग में रुपये कमाने का झांसा देकर भी लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इनमें रुचि दिखाने वाले लोग साइबर ठगों के संपर्क में आ जाते थे और फिर उनके कहने पर अपने मोबाइल में एपीके फाइल डाउनलोड कर फंस जाते थे।