-अग्रसेन भवन में दंडी स्वामी सत्यदेव आश्रम महाराज ने किए प्रवचन
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बड़ौत। अग्रसेन भवन में श्री सनातन धर्म प्रचारिणी महासभा के तत्वावधान में चल रहे चातुर्मास के दौरान रविवार को दंडी स्वामी ने कहा कि शिव महापुराण कथा हमें विपरीत परिस्थितियों में किस प्रकार जीवन यापन करना चाहिए यह सिखाती है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव प्रकृति में जिनको सब छोड़ते हैं या जिनके नाम से डरते हैं, उनको अपनाते हैं। जैसे विष, सर्प, भूत, पिशाच, श्मशान भगवान शिव इनको अपनाते हैं। इसी प्रकार भगवान शिव का परिवार एक-दूसरे के विरोधाभासी दिखते हुए भी परिवार के जीवन को जीना सिखाता है। भगवान शिव की सवारी नंदी बैल है। माता पार्वती की सवारी सिंह है, सिंह अन्य जानवरों को खा जाते हैं। भगवान गणेश जी की सवारी मूषक है। भगवान शिव के गले में सर्प रहते हैं, जो मूषक को खा जाते हैं, भगवान कार्तिकेय की सवारी मोर है, जो सर्प को खा जाते हैं। विभिन्न विषमताओं के साथ कैसे जीवन व्यापन करना चाहिए भगवान शिव परिवार सिखाता है। मनुष्य जीवन में थोड़ी सी परेशानी आने पर दुखी हो जाता है, उसको भगवान का ध्यान करना चाहिए। कथा श्रवण करने वालों में ब्रह्म सिंह गोयल, धर्म प्रकाश वर्मा, मंसाराम गर्ग, कृष्णपाल शर्मा, विवेक भारद्वाज, अंजू, आंचल, सुधा आदि मौजूद रहे।