बागपत के बड़ौत के गूंगाखेड़ी गांव 2010 से चल रहे मदरसे का भौतिक सत्यापन करने के लिए टीम पहुंची तो चौंक गई। मौके पर मदरसा तो क्या बोर्ड तक नहीं मिला। मदरसे का नाम ‘मदर टेरेसा मदरसा’ भी ऐसा, जिसे कोई सोच भी नहीं सकता कि इस नाम का भी मदरसा हो सकता है। जांच अधिकारी ने मदरसे की रिपोर्ट बनाकर अधिकारियों को सौंप दी है।
जिला अल्प बचत अधिकारी नृपेंद्र नाथ अग्निहोत्री बुधवार को लेखपाल सुरेंद्र राठी, कृष्ण राठी टीम के साथ मदर टेरेसा मदरसा के नाम से ग्राम गूंगाखेड़ी में वर्ष 2010 से चल रहे मदरसे के भौतिक सत्यापन के लिए पहुंचे। उन्होंने पूरे गांव में घूमकर मदरसे को तलाश किया।
जब मदरसे के बारे में उन्हें जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने ग्राम प्रधान संजीव से इस बारे में जानकारी की। ग्राम प्रधान संजीव ने इस नाम के मदरसे तो क्या गांव में कोई बोर्ड तक होने से इंकार कर दिया। इस संबंध में उन्होंने ग्राम प्रधान से लिखित रूप में लिया कि इस नाम से गांव में कोई मदरसा नहीं चलाया जा रहा है।
ग्रामीणों के भी हस्ताक्षर कराए। जिला अल्प बचत अधिकारी ने बताया कि यह मामला गंभीर है। वर्ष 2010 से इस मदरसे के लिए आ रही धनराशि भी हड़पी जा रही थी। यह धनराशि कहां गई, कौन हड़प रहा था, इसकी जांच शुरू कर दी गई है। जो लोग भी इस घोटालें में शामिल होंगे, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अभी कई मदरसे
बागपत। जिला अल्प बचत अधिकारी नृपेंद्र नाथ अग्निहोत्री ने बताया कि ग्राम निरपुड़ा, दोघट, बड़का और जौहड़ी में भी मिलते जुलते नामों और ऐसे नामों से मदरसे संचालित हैं, जो अलग हटकर हैं।
मदरसों के नाम पर बड़ा गोलमाल
सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों की तरह मदरसों के लिए भी भारी भरकम राशि प्राप्त होती है। फिलहाल मदरसों के उच्चीकरण के लिए भी धनराशि दी गई। कंप्यूटर, कंप्यूटर शिक्षा, प्रमुख विषयों के शिक्षकों के वेतन के नाम पर बजट दिया जा रहा है।
23 मदरसों की चल रही जांच
शासन के निर्देश पर एक साल से जिले के 23 मदरसों की जांच चल रही है। पहले 17 मदरसों का नाम जांच के लिए आया था, बाद में 5 नाम और आए। इसकी जांच एक बार एसडीएम द्वारा की जा चुकी है। मगर, उस जांच को संतोषजनक न मानते हुए शासन के निर्देश पर फिर से जांच कराई जा रही है।