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Baghpat News: स्वयं सहायता समूह ने बेच दी दुकान, गरीबों का राशन खा गया खरीदार

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- मुकारी गांव में लाभार्थियों का अंगूठा लगवाकर राशन नहीं देने की शिकायत पर पूर्ति विभाग के अफसरों की जांच में हुआ खुलासा
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- स्टॉक में नहीं मिले 85.70 क्विंटल चावल और 128.90 क्विंटल गेहूं, समूह की महिलाओं और खरीदार के खिलाफ थाने में दी शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बालैनी। मुकारी गांव में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आवंटित की गई राशन की दुकान गोपाल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने केवल एक शपथ पत्र पर खुद ही बेच दी। उस दुकान को खरीदने वाला ही गरीबों का 214 क्विंटल राशन खा गया। इसका खुलासा पूर्ति विभाग के अफसरों की जांच में हुआ। पूर्ति इंस्पेक्टर राहुल पटेल ने समूह की महिलाओं और राशन का गबन करने वाले दंपती के खिलाफ थाने में तहरीर दी है।
मुकारी निवासी डोली, उषा, देवेंद्र, निधि समेत अन्य ग्रामीणों ने राशन डीलर पर अंगूठा लगवाने के बाद भी राशन नहीं देने का आरोप लगाते हुए जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत का समाधान करने के लिए मुकारी गांव पहुंचे पूर्ति विभाग के अफसरों को पता चला कि दुकान का संचालन गोपाल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की जगह गीता और उसका पति रविंद्र कर रहे हैं। अफसरों ने 62 ग्रामीणों के बयान दर्ज किए, जिन्होंने कई माह से अंगूठा लगवाने के बाद राशन नहीं देने का आरोप लगाया।
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अफसरों के बुलाने पर गीता और रविंद्र ने फोन बंद कर लिए, जबकि वहां आई गोपाल समूह की सदस्य अनीता ने अन्य सदस्यों की सहमति से राशन वितरण की जिम्मेदारी गीता और उसके पति रविंद्र को देने के बारे में लिखकर दिया। यह भी बताया कि गीता और रविंद्र ने दुकान पर आया दो माह का राशन गबन कर लिया। 23 सितंबर को अफसरों ने राशन की दुकान दत्तनगर के राशन डीलर के यहां संबद्ध कर दी। 13 अक्तूबर को दत्तनगर के राशन डीलर ने मुकारी के लाभार्थियों का राशन दिलाने की मांग की तो 16 अक्तूबर को पूर्ति विभाग की टीम स्टॉक की जांच करने मुकारी गांव पहुंची।
वहां पर जांच करने पर स्टॉक में राशन नहीं मिला जबकि स्टॉक में 85.70 क्विंटल चावल और 128.90 क्विंटल गेहूं होना चाहिए था। इस मामले में बालैनी थाने के जांच अधिकारी शिवदत्त सिंह ने बताया कि राशन के गबन की शिकायत मिली है। जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
- अंगूठा लगवाकर पर्ची दी, राशन नहीं
मुकारी गांव की उषा ने बताया कि रविंद्र फरवरी 2024 से राशन वितरण कर रहा है। उन्होंने बताया कि दुकान पर राशन वितरण में काफी अनियमितताएं बरती गई। रेखा ने बताया कि अंगूठा लगवाने के बाद उन्हें पर्ची दी, लेकिन कई चक्कर लगाने के बाद भी राशन नहीं दिया।
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इस तरह होता है दुकान का आवंटन
किसी भी राशन की दुकान का संचालन स्वयं सहायता समूह कर रहा है और वह आगे दुकान नहीं चलाना चाहता है तो वह दुकान सरेंडर करने के लिए सीडीओ या डीएम के यहां प्रार्थना पत्र देंगे। इसके बाद गांव में अन्य स्वयं सहायता समूह या महिला को खुली बैठक कराकर दुकान संचालन की जिम्मेदारी दी जाती है। इस तरह से कोई स्वयं सहायता समूह खुद ही दुकान किसी अन्य को नहीं दे सकता है।
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