डूडा में घपला: अमीरों को दे दिया लाभ, गरीब बेघर
अमीरों को यमुना खादर में एक कमरे पर ढाई लाख दिए तो अमीनगर सराय में 15 बीघा के जमींदारों के मकान बने
पात्रों ने लाभ नहीं मिलने की शिकायत की, गरीबों को दूसरी किश्त के लिए भी दो साल से कटवाए जा रहे चक्कर
अंकित चौहान
बागपत। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में डूडा (जिला शहरी विकास अभिकरण) के अधिकारी खूब घपला कर रहे हैं। सरकारी कर्मियों और जमींदारों के मकान बनवाए जा रहे हैं तो गरीबों को बेघर रखा जा रहा है। यही नहीं नियमों को दरकिनार कर शहरी आवास योजना के तहत शहर से बाहर भी आवास के नाम पर पैसों की बंदरबांट की गई है। ये आरोप लगाते हुए मकान से वंचित गरीब जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी गरीबों को पक्का घर देने के लिए शहरी आवास योजना शुरू कराई थी। इस योजना को चलाने की जिम्मेदारी डूडा को सौंपी गई थी। डूडा ने आवास योजना शहरी के अंतर्गत जनवरी 2021 तक करीब 10 हजार लोगों को योजना का लाभ दिया। लेकिन इनमें अधिकतर को लाभ देने में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। ऐसे लोगों को लाभ दिया गया, जो पात्र ही नहीं थे। बागपत व बड़ौत में कई सरकारी कर्मियों व प्रॉपर्टी डीलरों ने अपनी पत्नियों के नाम आवेदन कर साठगांठ से योजना का लाभ ले लिया। अमीनगर सराय में एक ही परिवार के चार लोगों को योजना का लाभ दे दिया गया। यह केवल कुछ उदाहरण हैं, जो योजना में हुए घपलों को दर्शा रहे हैं।
जमींदारों को एक कमरा बनाने पर दे दिए ढाई लाख
पुराना कस्बे के कई लोगों ने यमुना खादर में एक-एक कमरा बनाकर चाहरदीवारी कर दी, तो उनको भी ढाई लाख रुपये का फायदा दे दिया गया। जबकि यमुना खादर के जंगलों में इस तरह योजना का लाभ मिल ही नहीं सकता है। इसी तरह किसी ने शहर से बाहर जंगल में चाहरदीवारी करके गेट लगा दिया तो उसे भी योजना का फायदा दिया गया।
तीन हजार रुपये लेकर 50 हजार की किश्त भेजी
चमरावल रोड पर रहने वाले योगेश कुमार ने बताया कि उसने मकान बनवाने के लिए आवेदन किया था। उसके यहां जब डूडा का कर्मचारी फोटो खींचने आया, तो उसने तीन हजार रुपये लिए थे। उसके बाद उसके खाते में पहली किश्त के 50 हजार रुपये भी पहुंच गए। इसके बाद डूडा के कर्मचारी ने उसके घर आकर गलती से मंजूरी दिए जाने की बात कही और उससे किश्त वापस करने के लिए दबाव बनाया। उसने किश्त वापस कर दी, लेकिन उसके तीन हजार रुपये नहीं लौटाए।
गरीबों की दो साल से किश्त लटकाई
योजना में चयनित गरीबों को दो-दो साल से चक्कर कटाए जा रहे है, उनकी किश्त नहीं भेजी जा रही है। इस कारण ही वह छप्पर व किराये के मकान में रहने के लिए मजबूर हैं। ऐसा कोई एक पीड़ित नहीं है, बल्कि इनकी बड़ी संख्या है। बड़ौत के बड़का रोड निवासी मइनुद्दीन ने अपनी पत्नी शकीला के नाम से आवेदन किया था, लेकिन उसे चक्कर कटाए जा रहे हैं। अमीनगर सराय के टंकी मोहल्ले की रहने वाली जाहिदा का कहना है कि उसकी पहली किश्त भेजने के बाद अब दूसरी किश्त नहीं दी जा रही है। बागपत की माता कालोनी के महबूब का कहना है कि उसकी एक किश्त आने पर मकान तुड़वा दिया था और काम शुरू कराने के बाद छत नहीं डली है। अब दूसरी किश्त नहीं दी जा रही है।
मुझे किसी काम से बड़ौत भेजा गया है और मकानों के बारे में वहां से आने के बाद जानकारी दे सकती हूं।
- रजनी पुंडीर, परियोजना निदेशक डूडा
अगर इस तरह से अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का लाभ दिया जा रहा है, तो यह पूरी तरह से गलत है। मामले की जांच कराई जाएगी और गड़बड़ी मिलती है तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। - राजकमल यादव, डीएम