प्रदेश महिला आयोग की सदस्य राजदेवी चौधरी बृहस्पतिवार की सुबह सांकरौद प्रकरण का सच जानने के लिए जाट बिरादरी की युवती के घर पहुंचीं। पीड़ित युवती से मिलकर घटनाक्रम के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद युवती के परिजनों से बातचीत की।
महिला आयोग की सदस्या ने कहा कि पीड़ित युवती की रिपोर्ट दर्ज नहीं होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। साथ ही पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट दर्ज नहीं करने का कारण पूछा जाएगा।
महिला आयोग की सदस्या राजदेवी चौधरी ने पीड़ित युवती का हाल जाना। इस दौरान युवती ने कहा कि दलित युवक रवि उसे पुलिस में नौकरी लगवाने का झांसा देकर दिल्ली ले गया था। इस दौरान उसने और उसकी भाई (दिल्ली पुलिस के सिपाही) ने बंधक बनाकर उसके साथ गैंगरेप किया।
आरोपियों की बहन और बाप ने उसे जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने उसे बरामद किया। वह अपने घर आ गई। हालांकि अपने परिवार की इज्जत की खातिर चुप रही।
इसके बाद आरोपी युवक की बहन ने उन्हें बदनाम करने को सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की है कि गांव में खाप पंचायत हुई, जिसमें फरमान सुनाया गया। गांव में किसी तरह की पंचायत नहीं हुई।
21 अगस्त को एसपी से शिकायत की,ल ेकिन पुलिस ने अभी तक उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इस दौरान उसने कहा कि यदि उसे इंसाफ नहीं मिला तो वह अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या कर लेगी। इसके अलावा गांव और परिवार के लोगों से भी उन्होंने पूछताछ की।
बाद में राजदेवी चौधरी ने कहा कि रिपोर्ट दर्ज न करने के बारे में पुलिस अधिकारियों से जानकारी की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस मामले में जरूर एफआईआर दर्ज कराएंगी।
मुख्यमंत्री को कराया जाएगा अवगत
बागपत। महिला आयोग की सदस्य राजदेवी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहले प्राथमिकता, महिलाओं की सुरक्षा और थाने में आने वाले पीड़ितों की रिपोर्ट दर्ज कराना है।
हालांकि इस मामले में तहरीर देने के 13 दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। यह बेहद गंभीर मामला है। इस पूरे प्रकरण से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।
आरोपी को सुरक्षा, पीड़ित को नहीं ः बागपत। पीड़ित युवती के परिजनों ने राजदेवी चौधरी को बताया कि पुलिस अधिकारियों ने आरोपी युवक के पिता को गनर मुहैय्या कर रखा है। पीड़ित पक्ष की कोई सुनवाई नहीं हो रही।
एसपी पर समझौते के प्रयास का आरोप ः बागपत। युवती के परिजनों और परिचितों ने राजदेवी चौधरी को बताया कि एसपी ने बुधवार शाम उन्हें अपने पास बुलाया। आरोप है कि उन्होंने उनसे इस मामले में समझौता करने को कहा। इस पर उन्होंने कह दिया कि जब उनका कोई मामला दर्ज ही नहीं हुआ है, तो समझौता किस बात का करें।
पुलिस अफसरों की मानी गलती ः बागपत। महिला आयोग की सदस्या राजदेवी चौधरी ने कहा कि सबसे पहली गलती पीड़ित युवती ने की है। इतना गंभीर मामला होने के बाद भी उसने इस बारे में किसी को अवगत नहीं कराया। उसके बाद पुलिस अधिकारी इस मामले में ढुलमुल रवैया अपना रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है।