राम मंदिर आंदोलन :
विवादित ढांचा टूटने के बाद मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने की थी बड़ौत में जनसभा, कार्यकर्ताओं में भर गए थे जोश
1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मेरठ जनपद की पांच सीटों पर मिली थी जीत
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। राम मंदिर आंदोलन भाजपा के लिए भी संजीवनी बन गया था। 1993 में विवादित ढांचा टूटने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बड़ौत नगर मेें सभा को संबोधित करने आए थे और कार्यकर्ताओं मेें जोश भर गए थे। यही वजह थी कि 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मेरठ जनपद की पांच सीटों पर जीत मिली थी।
साल 1989 से राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ। उस दौरान जनपद मेरठ हुआ करता था। इसमें किठौर, सिवालखास, खरखौदा, मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण, मेरठ कैंट, सरधना, हस्तिनापुर, बागपत, बरनावा, छपरौली सहित 11 विधानसभा थी। बागपत, बरनावा व छपरौली विधानसभा में किसी भी भाजपा नेता को कामयाबी नहीं मिली थी। भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व नगर अध्यक्ष विनोद जैन एडवोकेट बताते हैं कि विवादित ढांचा टूटने के बाद उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बड़ौत नगर के दिगंबर जैन इंटर कॉलेेज में सभा करने आए थे और कार्यकर्ताओं में जोश भर गए थे। इसके बाद वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव बरनावा विधानसभा से त्रिपाल धामा भाजपा के टिकट पर विधायक बने थे, जबकि छपरौली विधानसभा से वीरेंद्र पाल लौहड्डा व बागपत से बूढ़पुर निवासी चकबंदी के पूर्व सीओ वेदप्रकाश बहुत ही कम अंतरों से चुनाव हार गए थे। 11 विधानसभाओं में भाजपा को पांच सीटें मिली थी। इसके बाद तो पार्टी को जैसे जिले में संजीवनी मिल गई थी।
राम मंदिर आंदोलन से बदला नजरिया
बड़ौत। भाजपा के वर्तमान जिला उपाध्यक्ष व पूर्व मंडल अध्यक्ष राकेश जैन बताते हैं कि वर्ष 1992 में वह वार्ड अध्यक्ष थे। एक वक्त ऐसा था कि जब कोई पार्टी का बड़ा नेता यहां सभा करने आते थे तो नगर की बातें छोड़िये गांव से भी लोग नहीं आते थे। राम मंदिर आंदोलन की मुहिम तेज होने के बाद कल्याण सिंह, अशोक सिंघल और राजनाथ सिंह जैसे दिग्गज आए और पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर गए। आंदोलन तेज हुआ तो लोगों को नजरिया भी बदलने लगा।
1994 में रोकी थी रेल, खाई थी लाठियां
बड़ौत। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला मंत्री टोनी भारद्वाज बताते है कि राम मंदिर आंदोलन के लिए कई बार बड़े आंदोलन भी किए। यहां तक की 1994 में तो रेल रोको आंदोलन मेें भी बढ़चढ़ कर प्रतिभाग किया था। उस दौरान पुलिस की लाठियां भी खाई थी, लेकिन आज राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा हो गया, अब पूरे दुख भूल गए है।