सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में तोड़ी गई मस्जिद।
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कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मलबे को हटाए जाने के दौरान ईंट मिलने का दावा किया जा रहा है। इसने पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया है। दावा किया जा रहा है कि यह ईंट वर्ष 1909 की निर्मित है।
शनिवार सुबह 7:30 बजे क्लक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा शुरू की गई थी। उसके बाद देर शाम तक मलबे को हटाए जाने का कार्य जारी रहा। इस दौरान मस्जिद के मलबे की ईंट पर 1909 अंकित दिखा। दावा किया जा रहा है की मस्जिद में लगी यह ईंट वर्ष 1909 की है। कई लोगों का यह भी कहना है कि इससे मस्जिद के 119 वर्ष से भी अधिक पुरानी निर्मित होने का पता चलता है। हालांकि यह दावे से नहीं कहा जा सकता कि यह ईंट 1909 में ही निर्मित है या फिर यह किसी तरह की अन्य जानकारी को प्रदर्शित करता है। सोमवार को एएसआई के विशेषज्ञ ने भी स्थल पर मिले कुएं का निरीक्षण किया है।
इकरा हसन बोलीं- मस्जिद तोड़कर सरकार ने गैरकानूनी काम किया, प्रधानमंत्री से मिलूंगी
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले में कैराना सांसद इकरा हसन ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को सहारनपुर पहुंचीं इकरा हसन ने कहा कि सरकार के इशारे पर प्रशासन ने जल्दबाजी में मस्जिद को तोड़कर गैरकानूनी काम किया है। इस मामले को लेकर वह उच्च न्यायालय जाएंगी।
सहारनपुर मस्जिद प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कैराना सांसद इकरा हसन भी शामिल हुईं। वह अपने भाई एवं कैराना विधायक नाहिद हसन के साथ सहारनपुर सर्किट हाउस पहुंचीं। इससे एक दिन पहले पुलिस की ओर से हाउस अरेस्ट किए जाने की आशंका के चलते सांसद इकरा हसन अज्ञात स्थान पर चली गई थीं।
सर्किट हाउस में इकरा हसन ने कहा कि वह यह जानना चाहती हैं कि आखिर किस आदेश के तहत मस्जिद को तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि वह राज्यपाल और प्रधानमंत्री से भी मिलने का प्रयास करेंगी। उनके अनुसार, मस्जिद को ध्वस्त करने के लिए कोई न्यायालय का आदेश नहीं था।
कहा कि मस्जिद को इस तरह तोड़ा जाना बेहद दर्दनाक है। सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में 22 दिन का समय दिया गया था और उसके तहत मस्जिद को केवल सील किया जाना था। मस्जिद को सील भी किया गया था, लेकिन इसके बाद पर्याप्त समय दिए बिना उसे ध्वस्त कर दिया गया। सांसद ने कहा कि मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले में वह उच्च न्यायालय का रुख करेंगी और पूरे मामले में संबंधित आदेशों की जानकारी सामने लाने का प्रयास करेंगी।
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