बागपत। गांवों में विकास कराने के लिए आए ढाई करोड़ रुपये पर सचिव कुंडली मारकर बैठ गए तो शासन में पंचायतीराज विभाग की फजीहत हो गई, इसलिए जिले में पहली बार प्रतिकूल प्रविष्टि की जगह परिनिंदा प्रविष्टि जारी की गई। अब सचिवों की एक साल तक वेतन वृद्धि नहीं होगी तो पदोन्नति के लिए भी परेशानी झेलनी होगी।
जिले की 60 से अधिक ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए मिला ढाई करोड़ रुपये का बजट खर्च नहीं किया जा रहा है। इस कारण शासन तक फजीहत हो रही है और सीएम डैश बोर्ड में जिले की स्थिति काफी खराब है। इसको देखते हुए डीपीआरओ अरुण अत्री ने सचिवों से जवाब मांगा, मगर वह जवाब नहीं दे सके, इसलिए उन्होंने 24 सचिवों को बजट खर्च नहीं करने पर परिनिंदा प्रविष्टि दी। इसके अलावा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी। परिनिंदा प्रविष्टि मनीष, नीता, संदीप, शैलेष, शान मोहम्मद, अजय रूहेला, गौरव खोखर, प्रिंस, विकास कुमार, बॉबी, विनोद, कृष्ण कुमार, राहुल, अमित वर्मा, दीपक मान, विक्रम, विजीत, अखिलेश, अंजली, अंकित ढाका, इंद्रजीत, देशपाल, अमित मान, मयंक, निशांत, सचिन आदि को दी गई।
अंजलि सबसे ज्यादा 26.12 लाख रुपये दबाए बैठी
जिन सचिवों को परिनिंदा प्रविष्टि दी गई है, इनमें सचिव अंजलि 26.12 लाख रुपये दबाकर बैठी हैं। वह लगातार कहने के बाद भी उनको खर्च नहीं कर रही हैं। इसके बाद मनीष भी 26.03 लाख रुपये दबाए हुए हैं। वहीं सतीश, अमित वर्मा और नीता की स्थिति भी ठीक नहीं है। नीता का प्रधान के साथ भी विवाद रहा और इसके बाद भी वह रुपये खर्च नहीं कर रही।
परिनिंदा व प्रतिकूल प्रविष्टि में यह है अंतर
जब किसी कर्मी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाती है तो वह अपना लिखित में जवाब देता है और वह सर्विस रिकॉर्ड से तीन महीने में खुद ही खत्म हो जाती है। वहीं परिनिंदा प्रविष्टि के लिए कर्मी को अपने जवाब के साथ अधिकारी के यहां उसे खत्म करने के लिए अपील करनी पड़ती है। अधिकारी संतुष्ट नहीं होते तो परिनिंदा प्रविष्टि हमेशा के लिए रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है। उससे एक साल तक कोई वेतन वृद्धि नहीं होती है और इससे पदोन्नति तक में परेशानी होती है।
बजट खर्च नहीं करने वाले 24 सचिवों को जिले में पहली बार परिनिंदा प्रविष्टि दी गई है। कार्य नहीं करने वाले सचिवों पर लगातार शिकंजा कसा जाएगा। इनकी वजह से जिले की स्थिति खराब हो रही है। -अरुण अत्री, डीपीआरओ